जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बस्तर के पहले हालीवुड कलाकार टाइगर ब्वाय चेंदरू की पत्नी रैनी (70) अबूझमाड़ के गढ़बेंगाल से बाहर निकल कर अपने बेटे जयराम, बहू जनकाय और दो नातियों बिंदिया और समीर के साथ बस्तर दशहरा देखने सोमवार को जगदलपुर पहुंची। मंगलवार देर शाम परिवार बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म मावली परघाव में शामिल हुआ। इस दौरान रैनी दशहरा में उमड़ी भीड़ देखकर अचंभित थीं।

बुधवार सुबह बस्तर के लोक साहित्यकार रुद्र नारायण पानीग्राही के साथ मां दंतेश्वरी के दरबार पहुंची और बस्तर के राजा का महल देखा। भगवान जगन्नााथ मंदिर में विभिन्न गांवों से मनाने आए देवी-देवताओं के सामने सिर झुकाया। वार्षिक दशहरा बाजार में घरेलू उपयोग की सामग्रियों की खरीदारी की। रेलवे स्टेशन पहुंच नातियों को पहली बार रेलगाड़ी दिखाया। बुधवार दोपहर गढ़बेंगाल से खबर आई कि जंगली सुकरों ने घर बाड़ी में काफी उत्पात मचाया है, जिससे परिवार गांव लौट गया।

दंतेश्वरी मंदिर के बाहर नईदुनिया से चर्चा करते हुए रैनी ने बताया कि वह बेटे बहू के साथ पहली बार गांव से बाहर निकली है। यहां शहर आकर काफी अच्छा लगा। परिवार गरीबी में जीवन काट रहा है। रैनी ने कहा कि वह चाहती है कि उसके पति स्वर्गीय चेंदरू को भी सरकार से सम्मान मिले।

उन्होंने बताया कि पिछले दिनों की गांव के कुछ पढ़े लिखे युवाओं ने उसे बताया कि टाइगर ब्वाय के बारे में अखबार में खबरें छपी हैं। परिवार यह जानकार काफी खुश हुआ। रैनी ने बताया कि उसे पता चला है कि नारायणपुर में टाइगर ब्वाय की प्रतिमा की स्थापना सरकार करने जा रही है, जिससे पूरा गढ़बेंगाल खुश है और इस अवसर की प्रतीक्षा कर रहा है।

कौन था टाइगर ब्वाय चेंदरू

अबूझमाड़ के ग्राम गढ़बेंगाल में रहने वाला चेंदरू बाघ के साथ खेलने वाला एक आदिवासी बच्चा था। वर्ष 1957 में स्वीडिश फिल्म निर्माताओं ने चेंदरू पर आठ भाषाओं में फिल्म बनाई थी, जो अलग-अलग नाम से रिलीज हुई थी। जब फिल्म बनाई गई थी उस समय चेंदरु की उम्र केवल दस साल थी। चेंदरू मंडावी अविभाजित मध्यप्रदेश का एकमात्र ऐसा आदिवासी बच्चा था, जिसने पहली बार हालीवुड की फिल्म में काम किया था। अभाव और विपदा भरी जिंदगी व्यतीत करते हुए चेंदरु की 78 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई।

पर्यटन मंडल के प्रतीक चिन्ह बनेंं चेंदरू और टेंबू

नईदुनिया द्वारा टाइगर ब्वाय चेंदरू को उचित सम्मान नहीं मिलने को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की गई। 18 सितंबर 2022 को नईदुनिया ने व्यवस्था ने भूला दिया बस्तर के मोंगली और टाइगर ब्वाय चेंदरू शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।

खबर के प्रकाशन के बाद 23 सितंबर को बस्तर विकास प्राधिकरण की जगदलपुर में हुई बैठक में अध्यक्ष लखेश्वर बघेल ने नारायणपुर में चेंदरू की आदमकद प्रतिमा की स्थापना करने की घोषणा करते हुए 10 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए चेंदरू और टेंबू को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का प्रतीक चिन्ह बनाया। मुख्यमंत्री ने 27 सितंबर 2022 को विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर रायपुर में आयोजित टूरिज्म कान्वलेव 2022 में चेंदरू की प्रतिमा का अनावरण कर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का प्रतीक चिन्ह को लांच किया।

Posted By: Pramod Sahu

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