
चांपा। मैं अपने बड़े भाई को पिता से बढ़कर मानता था। भैय्या घर छोड़कर चले गए। वह उन्हें छोड़कर नहीं रह सकता इसलिए अपनी मां को साथ लेकर जा रहा हूं। सुसाइड नोट में यह बातें लिखकर लापता भाई के गम में दुनिया को मां-बेटे ने अलविदा कह दिया। इस हृदय विदारक घटना से नगरवासी सन्न हैं। वहीं बड़े भाई के लापता होने व मां-बेटे की खुदकुशी से उनके घर में अब कोई सदस्य नहीं है। बड़ी बहन संतोषी सोनी का विवाह बिलासपुर में हुआ है। घटना की सूचना पर आज रोती-बिलखती उसकी बहन पहुंची और परिजनों ने कानूनी औपचारिकता पूरी कर मां-बेटे का अंतिम संस्कार बोझिल मन से किया।
नगर पालिका चांपा के पंप ऑपरेटर शिवकुमार सोनी (27) पिता स्व. रविशंकर सोनी 1 जून को सुबह पंप चालू करने निकला। मंझली तालाब के पास स्थित पंप को चालू करने के बाद वह पास के एटीएम में पैसे निकालने पहुंचा। उसके बाद से वह लापता हो गया। युवक का दोनों मोबाइल नंबर उसी दिन से बंद आ रहा है। शिवकुमार की शादी बलौदा में तय हुई थी और 29 जून को उसकी सगाई थी। जबकि 2 जुलाई को उसकी शादी थी। शादी की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान युवक अचानक लापता हो गया। युवक की मां और छोटे भाई ने उसकी पतासाजी की, मगर उसका कहीं पता नहीं चला। ऐसे में वे मायूस हो गए। दस दिन बाद कोई सुराग नहीं मिलने पर मंगलवार की शाम उसकी मां टेकबाई सोनी (60) और छोटा बेटा लक्ष्मीनारायण सोनी दोनों ने पᆬांसी लगा ली। देर शाम तक जब उसके घर की बिजली नहीं जली तो आसपास के लोगों ने अंदर जाकर देखा तब मां-बेटे की लटकती हुई लाश मिली। सूचना पर पुलिस पहुंची और पंचनामा कार्रवाई बुधवार को करने की बात कहकर कमरे को सील कर दिया गया। आज पंचनामा और पीएम की कार्रवाई के बाद परिजनों को मां-बेटे का शव सौंप दिया गया। घटना स्थल से पुलिस को सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लक्ष्मीनारायण सोनी ने लिखा है कि भाई को पिता से बढ़कर मानता था। उनके बिना नहीं रह सकता। इसलिए अपनी मां को भी साथ लेकर जा रहा हूं। मुझे किसी से शिकवा-शिकायत नहीं है। इतना ही नहीं सुसाइड नोट में युवक ने किस सरापᆬा व्यवसायी से गहने बनाने के लिए कितना चांदी लिया है और किसको कितना लौटाना है, इसका भी हिसाब लिख दिया है। परिजनों ने भरे मन से आज मां-बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया।
बजनी थी शहनाई वहां पसरा मातम
दो जुलाई को जिस घर में शहनाई बजनी थी। उस घर में मां-बेटे की एक साथ खुदकुशी से आज दोनों की एक साथ चिता जली और घर में मातम पसर गया। इसे नियति की क्रूर लीला ही माना जा सकता है। शिवकुमार की बड़ी बहन संतोषी सोनी और उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मोहल्लेवासियों की आंखें की भी नम थी।
छह साल पहले छोटे भाई ने की थी खुदकुशी
शिवकुमार के सबसे छोटे भाई रामकुमार सोनी ने छह साल पहले अपनी जान दे दी थी। उसने बाल्को में आत्महत्या कर ली थी। उसके मौत के कारण का पता नहीं चल सका।
लापता युवक मिल जाता तो नहीं होती घटना
शिवकुमार के लापता होने की सूचना पुलिस को दी गई थी। पुलिस ने गुम इंसान कायम कर कागजी खानापूर्ति कर ली। एक-दो स्थान पर पतासाजी की औपचारिकता के बाद पुलिस भी शांत बैठ गई। इधर मां-बेटे का बुरा हाल था। अगर पुलिस समय पर कुछ करती और युवक का सुराग मिल जाता तो शायद यह घटना नहीं होती, मगर नियति को कुछ और मंजूर था।
''शिवकुमार की पतासाजी की जा रही थी, मगर परिजनों ने भावुकतावश यह पᆬैसला ले लिया और मां-बेटे ने खुदकुशी कर ली। उन्हें कुछ दिन और इंतजार करना था। कई साल बाद भी घर छोड़कर गए लोग वापस आ जाते हैं। सुसाइड नोट में लक्ष्मीनारायण ने बड़े भाई को छोड़कर नहीं रह सकता, इसलिए मां को साथ लेकर जाने का उल्लेख किया है।
केपी मरकाम
थाना प्रभारी, चांपा
''भावुकतावश मां-बेटे खुद को संभाल नहीं सके और पᆬांसी लगा ली। ऐसी मानसिकता बहुत कम देखने को मिलती है। मां-बेटे लापता युवक के बिना अपने जीवन को निरर्थक समझ गए और उन्होंने भावावेश में यह कदम उठा लिया। उन्होंने गंभीरता से नहीं सोचा और जल्दीबाजी में अपनी जान दे दी।
डॉ. केपी कुर्रे
प्राध्यापक समाजशास्त्र,
टीसीएल कॉलेज जांजगीर