
नईदुनिया प्रतिनिधि, चांपा : शारदीय नवरात्र में चांपा का सिवनी चौक आस्था, परंपरा और भारतीय हस्तशिल्प कला के अनूठे संगम का केंद्र बन गया है। कोरबा रोड स्थित दुर्गा पंडाल को पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध बिश्नुपुर के ऐतिहासिक टेराकोटा मंदिरों की तर्ज पर तैयार किया गया है। करीब 500 साल पुरानी टेराकोटा कला से प्रेरित सात मंजिला मंदिरनुमा संरचना अपनी भव्यता और कलात्मक सजावट से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
आयोजन समिति के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस तरह की थीम पर पंडाल तैयार करने का यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है। करीब डेढ़ एकड़ क्षेत्र में फैले इस पंडाल की ऊंचाई 120 फीट और चौड़ाई 150 फीट है। इसकी सजावट, मां दुर्गा की प्रतिमा और रोशनी की व्यवस्था पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
पंडाल को बांस, टोकरियों, मिट्टी की चूड़ियों, जूट और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से सजाया गया है। कारीगरों ने इन पारंपरिक वस्तुओं के इस्तेमाल से सात मंजिला मंदिरनुमा आकृति तैयार की है। दिन में इसकी बारीक कलाकारी और रात में रंग-बिरंगी रोशनी पंडाल की भव्यता को खास बना रही है।
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महारानी के स्वरूप में विराजीं मां दुर्गा
पंडाल के गर्भगृह में मां दुर्गा की 20 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। चांपा की महारानी के स्वरूप में तैयार प्रतिमा का आकर्षक श्रृंगार, पारंपरिक वस्त्र और मुस्कुराता मुखमंडल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
भटगांव के प्रसिद्ध मूर्तिकार ने प्रतिमा का निर्माण किया है। मां दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु पंडाल की कलात्मक सजावट और भव्य प्रतिमाओं को निहार रहे हैं।
हस्तशिल्प के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पंडाल की परिकल्पना के पीछे भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य है। प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार इस प्लास्टिक मुक्त पंडाल के माध्यम से पारंपरिक कला और पर्यावरण के अनुकूल सजावट को प्रोत्साहित किया जा रहा है।