
फोटोः 29 जानपी 1- मालखरौदा का सूखा तालाब
तालाब सूख गए, हालत बद से बदतर
मालखरौदा। नईदुनिया न्यूज। जनपद पंचायत मालखरौदा अंतर्गत ग्राम पंचायतों सहित आश्रित गांव में तालाबों के सूखने से जल संकट गहराने लगा है। सूखे तालाबों की हालत बद से बदतर हो गई है।
मालखरौदा ब्लाक के करीब आधे से ज्यादा तालाब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। हालात यह है कि एक भी तालाब ऐसा नहीं बचा है,जो लोगों के काम का हो और यह दुर्दशा ना सिर्फ सरकारी अनदेखी से हो रही है,बल्कि गांव के लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। जागरूकता का मतलब यह नहीं होता कि सब कुछ सरकार करें। जागरूकता का मतलब है कि जो लोग संसाधनों का उपयोग करते हैं वह भी इनके संरक्षण के बारे में सोचे। मालखरौदा जनपद पंचायत अंतर्गत गांव में तालाब पूरी तरह से सूख चुके हैं। जहां आम लोगों सहित मवेशी भी पानी के लिए भटक रहे हैं। जिसका प्रमुख कारण क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और गांव के लोगों में भी जागरूकता की कमी है। आज भी लोग अपने स्वार्थ के लिए ही पानी के संरक्षण करने के बजाय उसे बर्बाद करने में लगे हुए हैं। गांव के लोग धान की फसलों में तालाबों का पानी खींचकर पूरी तरह से सूखा देते हैं,जिससे तालाबों का पानी सूख जाता है, वहीं नहर में पानी आने के बावजूद भी तालाबों को भरने कोई रुचि नहीं दिखाते। जिसका खामियाजा पूरे 4 से 5 महीने तक भुगतना पडता है। इसमें ना केवल आम लोगों को परेशानी होती है,बल्कि मवेशियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पडता है। कई तालाबों का तो ऐसा हाल है कि युवाओं द्वारा तालाब सूखते ही तालाब के अंदर क्रिकेट का पिच बनाकर खेलते दिखाई देते हैं। ग्राम पंचायतों में विभिन्ना मद की राशि स्वीकृति मिलती है,लेकिन पंचायत स्तर में भी तालाबों के जीर्णोद्घार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। कुल मिलाकर स्थानीय जनप्रतिनिधि शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम गर्मी महीने में तालाबों के जीर्णोद्घार के लिए नहीं उठाया जाते। जिसका खामियाजा प्रत्येक वर्ष भुगतना पडता है। विभिन्ना ग्राम पंचायतों व गांव में जिस तालाब में पानी है उसमें अत्यधिक ऐसे तालाब है, जहां पानी ही खराब हो चुका है। जिसे सफाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाते और सूखे तालाबों में नहरों के पानी को भरने रुचि दिखाते हैं,जिससे जल संकट घर आते जा रहा है और बोर बोरिंग का जलस्तर भी गिरता जा रहा है।