
जांजगीर-चांपा (निप्र)। जिले में बच्चों व महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने शासन के टोल पᆬ्री नंबर का उपयोग लोग नहीं कर रहे हैं। व्यापक प्रचार-प्रसार व लोगों में जागरूकता के अभाव के कारण भी लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। जिले में मानव तस्करी निरोधक कक्ष, बच्चे व महिला हेल्प लाइन कागजों में ही संचालित हो रहा है। वहीं महीने भर से हेल्प लाइन का टोल पᆬ्री नंबर खराब पड़ा हुआ है।
जिले में महिलाओं व बच्चों के प्रति अपराध व प्रताड़ना को रोकने के लिए टोल पᆬ्री नंबरों की शुरूआत मानव तस्करी निरोधक कक्ष में की गई है। इसमें बालक व बालिका खुद के उᆬपर हो रहे अत्याचार की शिकायत टोल फ्री नंबर 1098 और महिलाएं टोल पᆬ्री नंबर 1091 में दर्ज करा सकते हैं। लेकिन व्यापक प्रचार-प्रसार के अभाव में लोग इसके प्रति जागरूक नहीं हो पाए हैं। जिससे इसका उपयोग समुचित ढंग से नहीं हो पा रहा है। सेल को शुरू हुए लगभग तील साल होने जा रहे हैं। बावजूद इसके इस सेल का उपयोग नाम मात्र का हो रहा है। साल के जनवरी से अगस्त तक आठ माह में 12 महिलाओं की शिकायत और 1 बच्चे की मौखिक शिकायत हुई। जिसमें अधिकांश शिकायतें महिलाओं के साथ गाली-गलौच की है। इस दौरान जिले के विभिन्न थानों में बलात्कार ,दहेज मृत्यु , छेड़छाड़ , यौन उत्पीड़न व महिला प्रताड़ना के कई मामले में दर्ज हुए हैं। महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं में इजापᆬा हुआ है। मगर टोल पᆬ्री नंबर के व्यापक प्रचार-प्रसार व जानकारी नहीं होने के कारण लोगों की पहुंच इनसे दूर है। बच्चों के शोषण व मानव तस्करी से संबंधित अपराध की सूचना टोल पᆬ्री नंबर से अब तक किसी ने नहीं दी है।
थानों में ज्यादा शिकायतें
टोल प्रᆬी नंबर से प्राप्त शिकायतों को सेल में दर्ज नहीं किया जाता है। बल्कि शिकायत की जानकारी संबंधित थाना क्षेत्रों में दी जाती है, जहां मामले दर्ज किए जाते हैं। घूम पिᆬर कर अंत में मामले की शिकायत दर्ज कराने के लिए लोगों को थाने का ही चक्कर लगाना पड़ता है। जिसके कारण भी लोग अपनी शिकयत सेल में कराने व समय की बरबादी के बजाए सीधे थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं।
सेल में स्थाई स्टापᆬ व संसाधन नहीं
मानव तस्करी निरोधक सेल के लिए वैसे तो 7 लोगों का स्टापᆬ है। इसमें 1 नोडल अधिकारी, 1निरीक्षक, 1 प्रधान आरक्षक, 3 आरक्षक और 1 महिला आरक्षक नियुक्त हैं, लेकिन सेल के लिए नियुक्त स्टापᆬ को दोहरा दायित्व होने के कारण इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। निरीक्षक को अजाक प्रभारी, प्रधान आरक्षक व आरक्षक को सीसीटीएनएस, महिला आरक्षक को डीएसबी के कार्यों में लगा दिया गया है। इसी प्रकार सेल के कार्यों के लिए मिले चार पहिया व दो पहिया वाहन का उपयोग विभाग के अन्य कार्यों में किया जा रहा है।
पᆬोन बंद पिᆬर भी हर माह का बिलिंग
सेल में महिलाओं के लिए हेल्प लाइन नंबर 222325 और टोल प्रᆬी नंबर 1091 दिया गया है। इसी प्रकार बच्चों के लिए हेल्प लाइन नंबर 222324 औ टोल प्रᆬी नंबर 1098 दिया गया है। दोनों की पीएनटी नंबर कई महिनों से बंद होने के बाद भी सेल को हर माह हजारों रुपए का बिल जमा करना पड़ रहा है।
'' सेल में नियुक्त स्टापᆬ को विभाग के जरूरी कार्यों में लगाया गया है। पᆬोन के बंद होने की जांच कराई जा रही है और बीएसएनएल को पत्र भी लिखा गया है। एसपी आपिᆬस बदलने के कारण अस्थाई रूप से मानव तस्कारी निरोधक कक्ष को आवक-जावक कक्ष बनाया गया है।
सुरेशा चौबे
नोडल अधिकारी, मानव तस्करी निरोधक शाखा
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