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स्कूली छात्र की शरारत से दहशत में खरौद; एआई का खतरनाक खेल, रची मगरमच्छ की कहानी

जांजगीर-चांपा जिले के नगर पंचायत खरौद के गढ़वा तालाब में मगरमच्छ होने की फर्जी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने से 3 दिनों तक दहशत रही। वन विभाग, पुलि...और पढ़ें

By Madan TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 02:24:16 PM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 02:24:16 PM (IST)
स्कूली छात्र की शरारत से दहशत में खरौद; एआई का खतरनाक खेल, रची मगरमच्छ की कहानी
एआई से तैयार की गई मगरमच्छ की तस्वीर

HighLights

  1. 10वीं के छात्र ने एआई से बनाई मगरमच्छ की फर्जी फोटो।
  2. 3 दिन तक खरौद के गढ़वा तालाब में परेशान रहा प्रशासन।
  3. साइबर जांच में खुली पोल, छात्र ने मांगी माफी, मिली चेतावनी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जांजगीर-चांपा: नगर पंचायत खरौद के गढ़वा तालाब में मगरमच्छ होने की फर्जी तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद तीन दिनों तक क्षेत्र में भय और भ्रम की स्थिति बनी रही। तस्वीर इतनी वास्तविक प्रतीत हो रही थी कि लोगों ने इसे सच मान लिया। सूचना के बाद प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और तालाब की निगरानी शुरू कर दी। बाद में जांच में पता चला कि तालाब में मगरमच्छ होने की खबर पूरी तरह फर्जी थी और तस्वीर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार की गई थी।

मामला तब सामने आया जब गढ़वा तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने का दावा करते हुए एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुई। तस्वीर में तालाब के पानी में मगरमच्छ स्पष्ट दिखाई दे रहा था। फोटो इतनी वास्तविक लग रही थी कि लोगों को उसके फर्जी होने का जरा भी संदेह नहीं हुआ। देखते ही देखते तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर फैल गई और तालाब के आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया।


रेस्क्यू टीम ने तालाब में चलाया निरीक्षण अभियान

मगरमच्छ होने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने 7 अगस्त को एसडीओ होरेश शर्मा, परिक्षेत्र सहायक विजयेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारियों के साथ गढ़वा तालाब का निरीक्षण किया। पुलिस आउटपोस्ट खरौद के प्रभारी मोहन साहू, पुलिसकर्मी, नगर पंचायत प्रतिनिधि और महिला कमांडो की टीम भी तालाब की निगरानी में जुटी रही। मगरमच्छ की संभावित मौजूदगी को देखते हुए तालाब से पानी निकालने और जांच करने की तैयारी तक की गई। हालांकि निरीक्षण और निगरानी के दौरान तालाब में मगरमच्छ होने के कोई प्रमाण नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित तस्वीर के स्रोत की जांच शुरू की।

पूछताछ में खुला एआई फोटो का राज

पुलिस की पूछताछ में पूरे मामले का राजफाश हुआ। सामने आया कि एक स्कूल के कक्षा दसवीं के छात्र और उसके साथियों ने एआई तकनीक की मदद से गढ़वा तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने वाली फर्जी तस्वीर तैयार की थी। इसके बाद छात्र ने इसे इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर दिया। पूछताछ में छात्र ने पुलिस को बताया कि उसने यह काम महज मजाक और शरारत के तौर पर किया था। उसे अंदाजा नहीं था कि तस्वीर इतनी तेजी से वायरल हो जाएगी और इसके कारण प्रशासन व वन विभाग को वास्तविकता की जांच के लिए मौके पर पहुंचना पड़ेगा। छात्र ने अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी।

तीन दिन तक प्रशासन और वन विभाग रहे सक्रिय

फर्जी तस्वीर के प्रसारित होने के बाद प्रशासनिक तंत्र भी सक्रिय हो गया। तालाब में मगरमच्छ होने की आशंका के चलते वन विभाग की टीम ने निरीक्षण किया और पुलिस ने भी निगरानी बढ़ाई। इस दौरान लोगों को तालाब के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई। एक फर्जी तस्वीर के कारण वन विभाग की रेस्क्यू टीम, पुलिस और नगर पंचायत के कर्मचारियों को कई स्तर पर निगरानी करनी पड़ी। इससे यह भी सामने आया कि एआई तकनीक से तैयार की गई तस्वीरें कितनी आसानी से लोगों को भ्रमित कर सकती हैं।

पुलिस ने बच्चों को समझाइश देकर छोड़ा

पुलिस सहायता केंद्र खरौद के प्रभारी मोहन साहू ने बताया कि सच्चाई सामने आने के बाद छात्र और उसके साथियों को समझाइश दी गई है। बच्चों को भविष्य में इस तरह की फर्जी तस्वीर या भ्रामक जानकारी इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट नहीं करने की हिदायत दी गई है। छात्र की गलती स्वीकार करने और माफी मांगने के बाद उन्हें समझाइश देकर छोड़ दिया है।

एआई के इस्तेमाल में सावधानी जरूरी

गढ़वा तालाब की यह घटना इंटरनेट मीडिया और एआई तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल का बड़ा उदाहरण है। किसी भी एआई से तैयार तस्वीर या इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित सूचना को बिना सत्यापन के सच मानना और आगे साझा करना अफवाह को बढ़ावा दे सकता है। एक छात्र की शरारत के कारण तीन दिनों तक लोगों में भय बना रहा और प्रशासन व वन विभाग को भी अनावश्यक रूप से सक्रिय होना पड़ा। ऐसे में सोशल मीडिया पर किसी भी तस्वीर या खबर को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।