जांजगीर-चांपा। नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले में जनसंख्या वृद्घि दर में नाममात्र की कमी आई है। वर्ष 91 से 2001 के दशक में जिले में 3 लाख 71 हजार 133 लोगों की जनसंख्या बड़ी थी, जबकि वर्ष 2011 की जनगणना में 3 लाख 3 हजार 201 लोगों की वृद्घि हुई है। इस तरह इस बार आबादी कुछ नियंत्रित हुई है। हालांकि जनसंख्या नियंत्रण की यह रफ्तार कापᆬी धीमी है। दस वर्षों में जिस गति से शिक्षा का स्तर व परिवार नियोजन के साधनों में इजापᆬा हुआ है, उस गति से जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका। इस रफ्तार से भी यदि जनसंख्या बढ़ती रही तो वर्ष 2021 में जिले की आबादी 20 लाख से ऊपर पहुंच जाएगी।
वर्ष 1991 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 9 लाख 46 हजार 298 थी जो 2001 की जनगणना में बढ़कर 13 लाख 17 हजार 254 हो गई। इस तरह इस दशक में जिले की आबादी 3 लाख 71 हजार 133 तक बढ़ गई। जनगणना 2011 में जिले की आबादी 16 लाख 19 हजार 707 तक पहुंच गई है। इस तरह इस दशक में जिले की आबादी में 3 लाख 2 हजार 553 की वृद्घि हुई। इस तरह पिछले दशक की वृद्घि से यह वृद्घि कुछ कम जरुर है, मगर संतोषजनक नहीं है। गांव और शहरों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार होने के साथ शिक्षा का स्तर ऊपर उठा है। इसके बाद भी जनसंख्या रोकने लोगों में अपेक्षित जागरुकता नहीं आ पा रही है। हालांकि 2011 की जनगणना में जरूर जनसंख्या में कुछ कमी आई है, मगर इसमें और कमी लाने का कारगर प्रयास आवश्यक है। जिस हिसाब से परिवार नियोजन के साधनों में वृद्घि हुई है और लोगों में जागरूकता आई है। उस हिसाब से जनसंख्या वृद्घि पर नियंत्रण नहीं है। समय के साथ-साथ बेरोजगारी बढ़ रही है और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी जमकर हो रहा है। बढ़ी हुई आबादी के कारण सुख सुविधाओं की चीजों में भी बढ़ोतरी हुई है, इसके चलते जहां सड़कों पर दबाव बढ़ा है, वहीं दुर्घटनाएं भी बढ़ी है। जल संकट और ईंधन की समस्या भी मुंह पᆬैलाए खड़ी है।
नगरीय क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ रही आबादी
नगरीय क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर ऊंचा है, इसके बावजूद जनसंख्या वृद्घि का आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा नगरीय क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ रहा है। जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनगणना में ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्घि दर नगरीय क्षेत्रों की अपेक्षा कम है। जनगणना 2011 के बाद जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक जिले की जनसंख्या 16 लाख 19 हजार 707 है और दशकीय जनसंख्या दर 23.1 प्रतिशत है।
जागरूकता का अभाव
जनसंख्या नियंत्रण के लिए नसबंदी, कापर-टी, गर्भ निरोधक गोलियों सहित और कई सुविधाएं हैं, लेकिन इसके बावजूद भी जनसंख्या वृद्घि पर रोक लगाने लोग रूचि नहीं ले रहे हैं। नसबंदी के लिए प्रोत्साहन राशि मिलने के बाद भी अधिकांश ग्रामीण दो के बजाय 4-5 बच्चों के बाद नसबंदी कराते हैं। पुरुष नसबंदी का हाल बेहाल है। इसके अलावा शिशु मृत्यु दर में गिरावट आई है। प्रसव के दौरान व बाद में होने वाली विभिन्न बीमारियों का उपचार संभव होने से बच्चों की अकाल मौत में कमी आई है। जिसके चलते जनसंख्या लगातार बढ़ रही है।
सभी समस्याओं का निदान जनसंख्या नियंत्रण
जनसंख्या वृद्घि, अशिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी आदि समस्याओं की जड़ है। यदि बढ़ती आबादी पर काबू पा लिया जाए तो लोगों को बुनियादी सुविधाएं आसानी से मुहैया होगी। जनसंख्या बढ़ने से कृषि भूमि भी बंट रही है। मकानों की संख्या में इजापᆬा हो रहा है, जिसके चलते खेती का रकबा भी घट रहा है। यहां तक पेयजल संकट का सामना भी लोगों को नगरों व महानगरों में करना पड़ रहा है। बेतहाशा जनसंख्या वृद्घि से हर जगह लोगों की कतार नजर आती है।
अभियान असपᆬल
जनसंख्या वृद्घि रोकने के लिए लोगों को जागरुक करने सरकार हर वर्ष करोड़ो रुपए खर्च करती है। इसके बाद भी जनसंख्या वृद्घि पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। प्रचार-प्रसार की खानापूर्ति एक दो कार्यक्रमों से कर दी जाती है। इसके अलावा नसबंदी कार्यक्रम महिलाओं तक सीमित है। पुरुषों को इसमें जरा भी रुचि नहीं है। जनसख्यां स्थिरीकरण पखवाड़ा भी दिखावे के लिए चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग समय पर शासन द्वारा दिए गए नसबंदी के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाता। हर साल 11 से 24 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा मनाया जाता है, मगर यह अभियान भी महज औपचारिक है।
जिले की जनसंख्या आंकड़ों में (वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार )
कुल जनसंख्या 1619707
पुरूष 815717
महिला 803990
दशकीय वृद्घि दर 23.01 प्रतिशत
शहरी जनसंख्या 225061
पुरुष 114316
महिला 110745
ग्रामीण जनसंख्या1394646
पुरुष701401
महिला 693245