जशपुरनगर। इन दिनों जिले में मिर्च उत्पादक किसानों को उनकी फसल की मुंहमांगी कीमत मिल रही है। मौसम की मेहरबानी ने किसानों का लाभ दोगुना कर दिया है। उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, झारखण्ड जैसे राज्यों में मिर्च की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मंडी व्यवसायी इन दिनों जशपुर की ओर दौड़ लगाते नजर आ रहे हैं।

जिले के बगीचा, मनोरा, जशपुर और दुलदुला विकास खण्ड में बड़े पैमाने में मिर्च की खेती की जाती है। इन तहसीलों की ढालूयुक्त जमीन मिर्च उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। गत पांच साल के दौरान जिले में मिर्च का रकबा और उत्पादन दोनों ही तीन गुना बढ़ा है। हालांकि किसानों के लिए आलू और टमाटर की तरह, मिर्च को भी जोखिम भरा फसल ही माना जाता है। बीमारी के साथ मंडी में आने वाले उतार चढ़ाव का सीधा असर किसानों पर पड़ता है। बीते साल मनोरा तहसील में कीट के प्रकोप ने कई किसानों को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया था।

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इससे एक साल पहले उप्र और महाराष्ट्र की मंडियों में आई मांग में भारी कमी का खामियाजा भी किसानों को भुगतना पड़ा था। इस दौरान किसानों का फसल की लागत निकालना मुश्किल हो गया था। इन सारे जोखिमों के बावजूद मिर्च का जादू इन दिनों किसानों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। चालू मानसून सीजन में कम बारिश होने से जहां धान उत्पादक किसानों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही हैं, वहीं मिर्च उत्पादकों के लिए मौसम की यह बेईमानी, वरदान साबित हो रही है। बारिश ना होने से किसानों को खेत से मिर्च तोड़ने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

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वहीं मिर्च उत्पादक दूसरे राज्य में हो रही झमाझम बारिश ने यहां की फसल को मंडी में पहुंचने से रोक दिया है। रूठे हुए मानसून का लाभ किसानों के साथ मजदूरों को भी मिल रहा है। इस साल मजदूरों को एक किलो मिर्च तोड़ने के एवज में 5 से 8 रुपए तक मजदूरी मिल रही है। मौसम के खुले रहने से एक मजदूर परिवार दिन भर में 40 से 50 किलो मिर्च की तुड़ाई असानी से कर लेता है।

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मंडियों में मिर्च की मांग की अपेक्षा आवक कम होने से मंडी व्यवसाईयों में फसल खरीदने की होड़ मची हुई है। मंडी व्यवसाई किसानों के दरवाजे पर वाहन खड़े कर नगद भुगतान देकर हाथों हाथ फसल उठा रहे हैं। इस वक्त किसानों को 45 से 50 रुपए प्रति किलो के बीच मिर्च का भाव मिल रहा है। इसी सीजन में गत वर्ष यह 25 से 30 रुपए की बीच सीमटा हुआ था। तीखे मिर्च से बरस रही इस मेहरबानी ने किसानों चेहरे दमक रहे हैं।

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Posted By: Prashant Pandey

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