
बगीचा(निप्र)। पीलिया से एक ग्रामीण की मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण विगत कई दिनों से पीलिया से पीड़ित था। समय रहते उचित उपचार नहीं होने के कारण शनिवार की सुबह उसकी मौत हो गई। यद्यपि अब तक प्रशासन ने पीलिया से मौत की पुष्टि नहीं की है। हालांकि बगीचा में हुई इस मौत से जिले में पीलिया को लेकर प्रशासन द्वारा कराया गया सर्वे संदेह के दायरे में आ गया है। सर्वे में जिले में पीलिया का एक भी मरीज नहीं पाया गया था।
मामला बगीचा विकासखण्ड के ग्राम कुरूमकेला ग्राम का है। ग्राम कुरूमकेला निवासी आनन्द मसीह विगत कई दिनों से बीमारी से ग्रसीत था। वह अपनी बडी बहन के साथ ग्राम कुरूमकेला में ही रहकर किसानी खेती का कार्य करता था।बार बार हो रहे बुखार से आनन्द परेशान था। आनन्द का पूरा शरीर पीला पड गया था। शनिवार की सुबह आनन्द घर के निकट लगे बोरिंग के पास गुडाखू कर रहा था। इसी दौरान चक्कर आने पर वह बेहोश होकर गिर पडा। परिजन कुछ कर पाते उससे पहले ही आनन्द ने दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य विभाग सक्रिय
बगीचा बीएमओ वाईके दुबे के अनुसार ग्रामीण के मौत की जानकारी उन्हें नहीं है। सर्वे के दौरान भी कोई बात सामने नहीं आाई थी। जानकारी मिलने के बाद वे विभाग को सतर्क करते हुये स्वास्थ्य अमला को ग्राम कुरूमकेला भेज रहे हैं। क्षेत्र में स्वास्थ विभाग निरंतर सक्रियता बरतते हुये अपनी जिम्मेदारी बखुबी निभा रहा है। इस वक्त वे जशपुर में विभागीय बैठक के लिये आये हैं।
स्वास्थ विभाग की खुली पोल
यूं तो जशपुर जिले में स्वास्थ विभाग द्वारा प्रतिमाह सर्वे व शिविर के नाम पर लाखों रू.पानी की तरह बहाये जाते रहे हैं। पर इनका आम नागरिकों को कितना फायदा पहुंचता होगा इस बात का अंदाजा तो सिर्फ इसी बात से ही लगाया जाता है कि गत कई महिनों से बीमार ग्रामीण के उपचार में स्वास्थ अमला कोई ध्यान नहीं दिया। चंद दिनों पहले ही बगीचा के सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र के द्वारा सभी मितानिनों से बगीचा विकासखण्ड के सभी ग्रामों में स्वास्थ संबंधी सर्वे कराया गया था। लेकिन स्वास्थ विभाग के सर्वे में इस बीमार ग्रामीण के बीमार होने का जिक्र ही नहीं है। जबकि ग्रामीण लंबे समय से बीमार था। ग्राम कुरूमकेला में हुये ग्रामीण की मौत से स्वास्थ विभाग के बडे बडे दावों की पोल खुल गई है। स्वास्थ विभाग के द्वारा मितानीनों से कराया गया सर्वे संदेह के दायरे में आ गया है।
नल जल को लेकर लापरवाही
प्रदेश में पᆬैले पिलिया के प्रकोप को देखते हुए जहां अन्य जगहों पर प्रशासन अतिरिक्त सावधानी बरत रही है। वही बगीचा में प्रशासन की नींद टूटती नजर नहीं आ रही है। नगर पंचायत द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पेय जल में भी सपᆬाई की कमी नजर आ रही है। यहां ना तो पानी टंकियों का नियमित सपᆬाई किया जा रहा है और ना ही होटल और ठेलों में बिकने वाली खाद्य पदार्थो की जांच की गई है। शनिवार को ग्रामीण की मौत के मामले को लेकर भी प्रशासन गंभीर नजर नहीं आया। मौत की सूचना पर पुलिस मृतक के घर पहुंची जरूर लेकिन सामान्य मौत मानकर लौट गई। मृतक का पोस्टमार्टम कराना तक जरूरी नहीं समझा गया। जबकि इस बीच मृतक के परिजन पिलिया से मौत की बात बार-बार दोहराते रहे।
पीलिया से ग्रामीण की मौत की कोई सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिली है। पीलिया से बचने के लिए विभाग सभी एतिहात बरत रहा है।''
वाईके दुबे,बीएमओ,बगीचा