कांकेर(नईदुनिया न्यूज)। तीन जिले के 14 ग्रामीणों को बेंगलुरू में बंधक बनाकर काम लिया जा रहा था। जिसमें नौ नाबालिग शामिल थे। जिसे बाल संरक्षण के छह सदस्यों की रेस्क्यू टीम ने सभी को बाहर निकाला। कलेक्टर के समक्ष पेश किया जहां कलेक्टर ने सभी को उनकी मजदूरी राशि देकर उनके परिजनों के सुर्पूद किया। वहीं बंधक बनाए गए बच्चों में कांकेर से सात बच्चे, कोंडागांव से चार, नारायणपुर से एक, बालोद से दो बच्चे शामिल है। जिसमें नौ नाबलिग बच्चे भी शामिल है।

मिली जानकारी के अनुसार कलेक्टर के आदेश पर महिला बाल विकास द्वारा टीम गठित किया गया। जिसमें जिला बाल सरंक्षण अधिकारी महिला एवं बाल विकास रीना लारिया जो टीम के प्रभारी थी, संरक्षण अधिकारी महिला एवं बाल विकास त्रिसंध्या साहू, श्रम निरीक्षक श्रम विभाग तोषन तिवारी, सहायक उपनिरीक्षक थाना आमाबेड़ा कैलाश पांडे, सहायक उपनिरीक्षक थाना अमाबेडा प्रेम लाल मरकाम, सहायक उपनिरीक्षक थाना अमाबेड़ा शारदा यादव शामिल थे। जिसके बाद छह सदस्यों की टीम 31 जुलाई को बेंगलुरू के लिए रवाना हुई। जहां टीम ने काफी मशक्कत के बाद बंधक बनाए सभी मजदूरी कर रहे बच्चों एवं ग्रामीणों को ग्राम टैम्नूल से बरामद किया और बंधक बनाए मालिक रमेश नायडू के पास सभी को निकाल कर वापस पांच अगस्त को सुबह कांकेर पहुंची।

न मजदूरी दे रहे थे और न ही बच्चों को स्वजनों से मिलने

बंधक बनाए गए मजदूरी करने गए बच्चों ने बताया कि वह बेंगलुरू के ग्राम टैम्नूल में रमेश नायडू 50 एकड़ से अधिक में फैले टमाटर प्लांट में काम करते थे। उनका मालिक उन्हें सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक 12 घंटा काम कराता था इस दौरान उनको उनकी मजदूरी राशि भी नहीं देता था और बच्चो को घर जाने से व परिजनों से बात करने पर भी मना करता था। जिससे बच्चे डर कर वहीं चुपचाप काम करते थे।

शिवलाल पांडे की शिकायत पर मामले का खुला मामला

बंधक बनाकर रखे बच्चे के पिता ग्राम चिखली निवासी आमाबेडा शिवलाल पांडे ने बताया कि उनका नाबालिग लड़का घर में किसी को बिना बताए गांव के ही देवेन्द्र सिंहा के साथ काम करने बेंगलुरू चला गया था। स्कूल खुलने पर वह अपने बेटे को स्कूल जाने के लिए वापस बुलाने के लिए वही किसी के पास बात कराने के लिए फोन किया तो बच्चे ने बताया कि उसे उसका मालिक रमेश घर आने के लिए नहीं दे रहा है और न रही उसके द्वारा किए काम का पैसा दे रहा है। बच्चे द्वारा यह बताने के बाद पिता ने सीधा इसकी शिकायत बाल संरक्षण एवं महिला बाल विकास में किया।

कलेक्टर ने दो लाख 28 हजार 940 रुपये मजदूरी राशि दिया

टीम द्वारा पांच अगस्त शुक्रवार को जैसे ही कांकेर पहुंची तो सभी बंधक बाल मजदूरों और ग्रामीणों को कलेक्टर के समक्ष पेश किया। जहां कलेक्टर शुक्ला ने सभी बच्चों को पढ़ाई करने की समक्षाईश केसाथ उनकी मजदूरी राशि जो दो लाख 28 हजार 940 रुपये को उनके हाथ में वितरण किया और सभी के पालकों के हावले कर दिया।

ज्यादा मजदूरी का लालच देकर बच्चों को किया जा रहा गुमराह

बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि जिले में बच्चो को दोगुना पैसा दिलाने के नाम पर यही के एजेंटो के माध्यम से बच्चों का बाल मजदूरी करने के लिए बाहर केराज्यों में भेजा रहा है।

एंजेटों को मिलता है मोटी रकम

काम कराने के लिए जब एंजेट जब मजदूरी के लिए बच्चो को लेकर जाते है तो उनकों मालिक द्वारा मोटी रकम दिया जाता है। मजदूर जितने ज्यादा होगें उतने ही ज्यादा मोटी रकम मिलता है।

एंजेटों पर भी होगी कार्रवाई

पालकों ने कलेक्टर से मांग किया कि ऐसे एंजेटो पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जो बच्चों को लालच देकर बाहर काम के लिए भेजते है। मांग पर कलेक्टर ने ऐसे एजेंटों पर कार्रवाई करने के आदेश बाल सरंक्षण अधिकारी को दिया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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