
नईदुनिया न्यूज, कांकेर। भीषण गर्मी के बीच कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत गोण्डाहुर के आश्रित गांव मातालकुडूम में ग्रामीण गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। करीब 18 परिवारों वाले इस गांव में आज तक न सड़क पहुंची है, न बिजली और न ही पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था हो पाई है। गांव में लगा एकमात्र हैंडपंप पिछले कई वर्षों से खराब पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दी, लेकिन अब तक न तो हैंडपंप की मरम्मत हुई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। मजबूरी में ग्रामीण झरिया का दूषित पानी पीने को विवश हैं।

मातालकुडूम गांव में रहने वाले 18 परिवारों के लिए पानी का एकमात्र सहारा यह झरिया है। इसी पानी का उपयोग ग्रामीण पीने, खाना बनाने, नहाने और कपड़े धोने तक के लिए कर रहे हैं। दूषित पानी के इस्तेमाल से गांव के बच्चे और बुजुर्ग कई बार बीमार पड़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
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सिर्फ पानी ही नहीं, गांव आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गांव में अब तक बिजली नहीं पहुंची है। छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं है। गांव तक पहुंचने के लिए केवल एक संकरी पगडंडी ही सहारा बनी हुई है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नेता गांव पहुंचते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव फिर से उपेक्षा का शिकार हो जाता है। 30 वर्षों से बसे इस गांव में आज तक सड़क, बिजली और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं।
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सरकार भले ही अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के दावे कर रही हो, लेकिन मातालकुडूम जैसे गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार आखिर कब इन ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान कर पाते हैं।