
कांकेर। बम से खेलना उनकी फितरत थी। बम से उन्हें डर नहीं लगता था बल्कि जैसे ही पता चलता कि कहीं बम है तो तुरंत भागे-दौड़े जाते और बम को डिफ्यूज करते। यह कहानी नहीं, हकीकत है उस जवान की, जो अंतिम दम तक बम से ही खेलता रहा और बम डिफ्यूज करते ही जंगलवार कॉलेज का यह हीरो शहीद हो गया।
जंगलवार कॉलेज के बम विशेषज्ञ नरेंद्र सिंह बुधवार सुबह 8 बजे डीएसपी रैंक के कुछ नव प्रशिणक्षार्थियों को बम की तकनीक समझा रहे थे। डेमो के लिए उन्होंने जीवित बम फेंका जिसे फटना था, लेकिन नहीं फटा। उसे देखने के लिए नरेंद्र बम की ओर बढ़े और जैसे ही झुके बम फट गया।
स्प्रिंटर तेजी से निकलकर उनके दाहिनी आंख से होते हुए सिर में जा घुसा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल नरेंद्र सिंह को तत्काल शासकीय कोमलदेव जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दोपहर दो बजे पोस्टमार्टम के बाद उनका शव हेलिकॉप्टर से गृहग्राम डिडवाना,नागौर (राजस्थान) भेज दिया गया।
218 बमों को किया डिफ्यूज
पिछले 16 साल से एनएसजी व मिजोरम के वारंगटे व जंगलवार में बम का प्रशिक्षण देने वाले नरेन्द्र बम की बारीकियों को लेकर विख्यात थे। श्रीलंका में अशांति के दौर में भारत से भेजी गई शांति सेना के बम निरोधक दस्ते में भी वे शामिल थे।
एनएसजी से रिटायर होने के बाद वे पिछले 10 साल से कांकेर के जंगलवार कॉलेज में बम डिफ्यूज ट्रेनर के रूप में पदस्थ थे। इस दौरान उन्होंने प्रदेशभर में लगभग 218 बमों को निष्क्रिय किया। जिससे लगभग 1900 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था। इसतरह सैकड़ों जिंदगियां बचाने वाले नरेन्द्र पूरे इलाके के हीरो बन गए थे।
सैकड़ों की बचाई जान
नरेंद्र सिंह कांकेर जिले के अलावा छत्तीसगढ़ के सभी नक्सल प्रभावित इलाकों में बम निकालने जाते थे। वह चाहे टिफिन बम हो, बारूदी सुरंग हो, पाइप बम हो या आईडी हर प्रकार के विस्फोटक को मिट्टी में मिलाने की महारथ हासिल थी। राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा में एसपी शहीद विनोद चौबे पर हुए हमले के बाद वे मदनवाड़ा गए औैर नक्सलियों द्वारा बिछाए गए बमों का जखीरा बरामद किया था।
नारायणपुर में तात्कालिक पुलिस अधीक्षक रविन्द्र सिंह भेंड़िया के एन्टी लैंड माइन वीकल को उड़ाने की घटना के बाद वे घटनास्थल से ही दो और बम बरामद कर अन्य बड़ी घटना को नाकाम किया था। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों के अलावा धमतरी के रिसगांव मुठभेड़, गरियाबंद, राजनांदगांव के अलावा गढ़चिरौली तक बम बरामद करने गए।
आधी रात को भी निकल जाते थे बम डिफ्यूज करने
जंगलवार के डायरेक्टर बीके पोनवार का कहना है कि बमों के मामलों में नरेंद्र को इतनी आतुरता थी कि यदि आधी रात को भी सूचना मिले तो नरेंद्र आधी रात को भी बम डिफ्यूज करने निकल जाया करते थे।