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छत्तीसगढ़ के सरोना में भालुओं का भय: कभी मंदिर के नारियल से पेटपूजा तो कभी दरवाजा तोड़कर भूख मिटाने की कोशिश

कांकेर जिले की सरोना तहसील के गांवों में इन दिनों भालुओं का भयंकर आतंक फैला हुआ है। रात के समय भालू रिहायशी इलाकों में घुसकर तोड़फोड़ कर रहे हैं और पि...और पढ़ें

By ND kankerEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 06:00:12 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 06:01:49 PM (IST)
छत्तीसगढ़ के सरोना में भालुओं का भय: कभी मंदिर के नारियल से पेटपूजा तो कभी दरवाजा तोड़कर भूख मिटाने की कोशिश
रिहायशी इलाके में चहलकदमी करता भालू। - स्थानीय निवासी

HighLights

  1. सरोना तहसील में भालुओं का आतंक
  2. जंगलों की कटाई से गांवों में आ रहे जीव
  3. वन विभाग की निष्क्रियता से ग्रामीण परेशान

नईदुनिया प्रतिनिधि, कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतर्गत आने वाली सरोना तहसील और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों भालुओं का भय छाया हुआ है। रात के समय भालुओं का रिहायशी बस्तियों में खुलेआम विचरण करना आम हो गया है। विशेषकर सरोना और नर्सरी पारा मुड़पार जैसे क्षेत्रों में भालू रात के वक्त गांवों के भीतर प्रवेश कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, ये भालू मंदिरों में स्थित शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले नारियल को तोड़कर खा रहे हैं और दूध या अन्य पेय पदार्थ भी गटक रहे हैं। इतना ही नहीं, खाने की तलाश में वे घरों के फाटकों और दरवाजों को तोड़कर अंदर तक घुसने लगे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की रातों की नींद उड़ गई है।


हमले की घटनाएं और रेस्क्यू टीम की सुस्ती

हाल ही में स्थिति तब और अधिक भयावह हो गई जब पिछले शुक्रवार की रात एक आक्रामक भालू ने एक दंपति पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायलों का इलाज अभी भी अस्पताल में चल रहा है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कांकेर वन मंडल या सरोना रेंज के अंतर्गत कोई सक्रिय रेस्क्यू टीम मौजूद होती, तो समय पर सूचना मिलने पर इस खतरनाक भालू को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जा सकता था। परंतु वन विभाग की लचर कार्यशैली के कारण ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

जंगल की कटाई और तार फेंसिंग बन रही मुख्य वजह

इस बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीछे वनों का लगातार उजड़ना मुख्य कारण माना जा रहा है। वन ग्रामों के लोग पहाड़ों को काटकर खेत बना रहे हैं, बड़े-बड़े पेड़ों की अवैध कटाई कर रहे हैं और जंगलों को समतल कर खेती कर रहे हैं। इसके चलते भालुओं के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए हैं और उनके हिस्से के फलदार वृक्ष भी कट चुके हैं, जिससे उन्हें जंगल में भोजन नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, वन विभाग द्वारा जंगलों के चारों ओर तार का घेरा लगा दिए जाने के कारण भी वन्य पशुओं का मार्ग बाधित हुआ है और वे मजबूरन गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।

विभाग और ग्रामीणों में तालमेल का अभाव

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच आपसी तालमेल का पूरी तरह अभाव है। वन ग्रामों में धड़ल्ले से इमारती लकड़ी की कटाई कर चिरान व्यापारियों को बेची जा रही है, और विभाग सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए, जंगलों को बचाया जाए और गांवों में आतंक का पर्याय बन चुके भालू को जल्द से जल्द रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह पर भेजा जाए, ताकि लोग सुरक्षित जीवन जी सकें।