
नईदुनिया प्रतिनिधि, दुर्गूकोंदल (कांकेर)। सरकारी योजनाओं, कल्याणकारी नीतियों और शैक्षणिक दाखिलों के लिए अनिवार्य बन चुके आधार कार्ड में दर्ज तकनीकी व लिपिकीय त्रुटियों को निःशुल्क दुरुस्त करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ (युवा प्रभाग) के प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी ने इस संबंध में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित राज्यपाल, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने त्रुटि सुधार की जटिल प्रक्रिया को सरल करने और ग्रामीण अंचलों में निःशुल्क शिविर आयोजित करने की मांग की है।
ज्ञापन में ललित नरेटी ने रेखांकित किया कि आधार आज हर आम नागरिक के जीवन का अपरिहार्य हिस्सा बन चुका है। इसके विवरण में त्रुटि होने पर लोगों को सरकारी लाभों से वंचित होना पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि पंजीयन या अद्यतन के समय आधार केंद्र के आपरेटरों द्वारा की गई गलतियों का खामियाजा आम जनता को क्यों उठाना पड़े? वर्तमान में सुधार कराने के लिए ग्रामीणों को बार-बार दूरस्थ केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।
नरेटी ने बताया कि आधार में जन्मतिथि अथवा नाम की वर्तनी गलत होने के कारण विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। स्कूली छात्रों की छात्रवृत्ति रुक जाती है और सरकार द्वारा अनिवार्य की गई अपार आईडी (APAAR ID) बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शैक्षणिक दस्तावेजों से मिलान न होने के कारण कई मेधावी छात्र औपचारिक प्रक्रियाओं में ही उलझकर रह जाते हैं।
दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले निर्धन परिवारों के लिए जिला मुख्यालय जाकर संशोधन कराना और राजपत्र में नाम प्रकाशन जैसी विधिक प्रक्रियाओं का खर्च उठाना बेहद कठिन है। समाज ने मांग की है कि शासन विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाकर निःशुल्क सुधार शिविर लगाए। साथ ही आम जनता के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची स्थानीय और सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाए ताकि ग्रामीणों को बिचौलियों से बचाया जा सके।