
नईदुनिया प्रतिनिधि, कांकेर। शहर के इमलीपारा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 15 सितंबर की रात पेड़ पर आराम करता भालू दिखाई देने से रहवासियों में चिंता बढ़ गई। रात करीब 10 से 11 बजे कॉलोनी के लोगों ने भालू को पेड़ पर देखा और अपने मोबाइल कैमरों में उसकी तस्वीरें भी खींचीं।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 150 से अधिक क्वार्टर हैं। रिहायशी इलाके में भालू की मौजूदगी को सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है। कॉलोनी परिसर और आसपास छोटे बच्चे भी खेलते हैं, ऐसे में रहवासियों में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है।
बताया गया कि, भालू काफी देर तक पेड़ पर बैठा रहा। लोगों ने इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाए। रिहायशी इलाके में भालू के पहुंचने की सूचना से आसपास के लोगों में सतर्कता बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि रात के समय कॉलोनी के आसपास भालू की आवाजाही से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है।
गांवों के बाद शहर तक पहुंच रहे भालू
जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में भालुओं की आवाजाही पहले भी सामने आती रही है। सरोना क्षेत्र के कई गांवों में भालुओं के घरों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं। भोजन की तलाश में भालुओं के बस्तियों में आने की घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
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जनवरी 2025 में डोंगरकट्टा क्षेत्र में भालू के हमले में पिता-पुत्र की मौत हुई थी। अगस्त 2026 में नरहरपुर क्षेत्र में भालू के हमले में भाई-बहन की मौत और एक महिला के घायल होने की घटना भी सामने आई। इससे जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ी है।
अब तक 11 लोगों की मौत, 70 घायल
कांकेर वन मंडल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच भालू और तेंदुए के हमलों में 11 लोगों की मौत हुई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए। यह आंकड़ा दोनों वन्यजीवों का संयुक्त है। भालू के हमलों से हुई मौतों का वर्षवार अलग आंकड़ा वन विभाग से लिया जाना जरूरी है।
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