कांकेर(नईदुनिया न्यूज)। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डा. संजय कन्नाौजे की अध्यक्षता में रविवार को जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें वर्ष 2021-22 में 25 हजार 450 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसल के लिए सिंचाई पानी देने का अनुमोदन किया गया है।
जल संसाधन संभाग के कार्यपालन अभियंता आरआर वैष्णव ने बताया कि वर्तमान में किसानों की मांग के आधार पर परलकोट जलाशय से सौ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ सिंचाई के लिए पानी दिया जा चुका है तथा सिंचाई पानी अभी भी दिया जा रहा है। इसी प्रकार जिले के 10 लघु सिंचाई योजनाओं से भी खरीफ सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है, शेष जलाशयों में पर्याप्त जल उपलब्धता एवं मांग के आधार पर पानी दिए जाने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि जिले के 77 जलाशयों में से 52 जलाशयों में शून्य से 25 फीसद, 21 जलाशयों में 26 से 50 फीसद, तीन जलाशय में 51 से 75 फीसद तथा 1 जलाशय में 76 से 99 फीसद जल भराव है, अभी तक किसी भी जलाशय में शत-प्रतिशत जलभराव नहीं हुआ है। कार्यपालन अभियंता ने बताया कि परलकोट मध्यम जलाशय में 11 फीसद और मयाना जलाशय में मात्र 10 फीसद ही जल भराव हुआ है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में बहुत कम है।
कृषि विभाग के उपसंचालक एनके नागेश द्वारा बताया गया कि विकासखंड कांकेर एवं चारामा में पर्याप्त वर्षा नही होने के कारण कृषि कार्य प्रभावित हुआ है, जिसके कारण अभी भी बियासी एवं रोपा का कार्य लगभन 20 फीसद बचा हुआ है। अल्प वर्षा की स्थिति में कृषि विभाग द्वारा कटिंनजेंसी प्लान वैकल्पिक व्यवस्था के तहत् कुलथी, मूंग आदि फसल जिसमें पानी की मात्रा कम लगता है, से संबंधित प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डा. संजय कन्नाौजे ने जीर्ण-शीर्ण नहरों की मरम्मत के लिए मनरेगा मद से अधिक से अधिक मिट्टी कार्य का प्रस्ताव के साथ ही गेटों का भी मरम्म्त प्रस्ताव 15 दिन के भीतर प्रस्तुत करने के लिए कार्यपालन अभियंता को
निर्देशित किया।