कौशल सोनी,नईदुनिया, कांकेर। कांकेर जिले के पीढ़ापाल अनुसूचित क्षेत्र में कथित षड्यंत्रपूर्वक मतांतरण के खिलाफ 26 ग्राम सभाओं ने एकजुट होकर बड़ा कदम उठाया है। शनिवार 14 जून को ग्राम मुरागांव में आयोजित रूढ़िगत पारंपरिक संयुक्त ग्राम सभा में ईसाई चर्च, प्रार्थना सभा और पादरियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।
साथ ही धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित क्षेत्र में जमीन न देने और आरक्षण का लाभ ले रहे धर्मांतरितों की डी-लिस्टिंग का संकल्प भी लिया गया।
26 गांवों के प्रतिनिधि हुए शामिल
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) के तहत पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में आने वाले कांकेर ब्लॉक के पीढ़ापाल क्षेत्र में यह संयुक्त ग्राम सभा हुई। इसमें कुरिष्टीकुर, मांदरी, मोदे, किरंगापाटी, धनतुलसी, तुलतुली, पीढ़ापाल, कानागांव, कलमुच्चे, टोन्डामरका, मुंजालगोंदी, बुधियारमारी, ईमलीडिही, भैंसगांव, मुरागांव, खसगांव, तरांदूल, धनेली, कठोली, पुसाझार, कमकाकुडुम, सिलीबहार, मर्रापी, दोबेहिरी, तेलावट समेत 26 गांवों के ग्राम सभा अध्यक्ष, सरपंच, पंच, गायता, पटेल, ठाकुर, भूमियार, मांझी, सिरहा, भगत, पेनो पुजारी और सर्व समाज के प्रमुख शामिल हुए। अध्यक्षता ग्राम सभा अध्यक्ष मुरागांव ने की।
ग्राम सभा के 5 बड़े फैसले
संयुक्त ग्राम सभा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13(3)(क), छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 और पेसा कानून 1996 व छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के तहत ये प्रस्ताव पारित किए।
- 26 गांवों की सीमा में ईसाई चर्च, प्रार्थना सभा और पास्टर, पादरियों के प्रवेश पर पूर्ण रोक।
- ईसाइयों और धर्मांतरित व्यक्तियों को पांचवी अनुसूचित क्षेत्र व पेसा गांवों में एक इंच भी जमीन नहीं दी जाएगी।
- आरक्षण का लाभ ले रहे धर्मांतरित व्यक्तियों के जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर डी-लिस्टिंग की जाएगी।
- शासकीय व अर्ध शासकीय कर्मचारी जो सेवा के नाम पर धर्मांतरण करा रहे हैं, उन्हें चिन्हांकित कर रंगे हाथों पकड़कर प्रशासन को सूचना दी जाएगी।
- सामाजिक समरसता के संरक्षण के लिए सर्व समाज का गठन किया गया। सर्वसम्मति से योगेश किशोर ठाकुर को अध्यक्ष चुना गया।
देवी-देवताओं को शैतान बताकर आस्था पर हमला
ग्राम सभा ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सेवा व स्वास्थ्य के नाम पर बहला-फुसलाकर, प्रलोभन देकर अवैध धर्मांतरण कराया जा रहा है। हमारी देवी-देवताओं, ग्राम शीतला माता, 18 पाट 32 बहनी, बानी बिरादरी व्यवस्था, रूढ़ि परंपरा और आस्था पर हमला हो रहा है।
ईसाई चर्च और पादरी हमारे देवी-देवताओं को शैतान बताकर आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं। इससे भाई-भाई, कुटुंब और समाज में हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्रामीण व्यवस्था चरमरा गई है, संयुक्त प्रस्ताव में कहा गया। ग्राम सभा ने कहा कि धर्मांतरण से आदिम संस्कृति और सांस्कृतिक पहचान को खतरा है। रूढ़ि प्रथाओं के संरक्षण के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।