
नईदुनिया न्यूज, भानुप्रतापपुर। सिवनी में नियमों को ताक पर रखकर की गई बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के बाद पर्यावरण संरक्षण की पोल खुल गई। दरसल एक रसूखदार उद्योगपति ने अपनी 30 एकड़ जमीन पर जेसीबी चलवाकर 144 से अधिक विशालकाय पेड़ों को जड़ से उखाड़ फेंका गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब यह हरियाली का संहार चल रहा था, तब स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
भिलाई के लाइट इंडस्ट्रियल एरिया स्थित फर्म मनमीत इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के संचालक संदीप अग्रवाल ने सिवनी में खसरा नंबर 183 की 30 एकड़ जमीन खरीदी है।
बताया जा रहा है कि यहां सोलर प्लांट लगाने की तैयारी है। इसी कार्य के लिए बिना किसी वैध अनुमति के भारी मशीनों का उपयोग कर हरे-भरे जंगल को मैदान में तब्दील कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर जब उजाड़ की तस्वीरें वायरल हुईं, तब जाकर वन और राजस्व विभाग की नींद खुली। आनन-फानन में डिप्टी रेंजर श्रीकांत यदु के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुँची और ठूंठों की गिनती कर पंचनामा तैयार किया।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस अवैध कटाई की सूचना हल्का पटवारी अश्वनी साहू और संबंधित बीट गार्ड को बार-बार दी गई थी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। ग्रामीणों का कहना है। बिना अधिकारियों के संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों को उखाड़ना संभव नहीं है। अब जब मामला सार्वजनिक हो गया है, तो केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है।
आधिकारिक तौर पर अब तक 144 बड़े पेड़ों को उखाड़ने की पुष्टि हुई है। आशंका है कि कई पेड़ों को काटकर मौके से गायब कर दिया गया है। नन्हे पौधों का विनाश सैकड़ों छोटे पौधों को भी जेसीबी से रौंद दिया गया है, जिनकी गणना जारी है।
अब सबकी नज़रें भानुप्रतापपुर एसडीएम गंगाधर वाहिले पर टिकी हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि कोई गरीब किसान अपने खेत का एक पेड़ भी काट ले, तो प्रशासन उस पर भारी जुर्माना ठोक देता है। ऐसे में 30 एकड़ के जंगल को उजाड़ने वाले इस रसूखदार उद्योगपति और दोषी कर्मचारियों पर प्रशासन क्या कड़ा रुख अपनाता है और मशीनों की जब्ती करता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।