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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 24, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नहीं रही कवर्धा विधानसभा की पहली महिला विधायक राजमाता शशिप्रभा देवी

कवर्धा विधानसभा पहली और दो बार की महिला विधायक रहीं राजमाता शशिप्रभा देवी (80)का निधन शनिवार को गया। उन्हें शहर के लोगों ने अंतिम विदाई दी। महाराजा स्...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Sat, 24 Oct 2020 08:46:38 PM (IST)Updated Date: Sat, 24 Oct 2020 08:46:38 PM (IST)
नहीं रही कवर्धा विधानसभा की पहली महिला विधायक राजमाता शशिप्रभा देवी

कवर्धा(नईदुनिया न्यूज)। कवर्धा विधानसभा पहली और दो बार की महिला विधायक रहीं राजमाता शशिप्रभा देवी (80)का निधन शनिवार को गया। उन्हें शहर के लोगों ने अंतिम विदाई दी। महाराजा स्व. विश्वराज सिंह की पत्नी थीं। राजमाता शशिप्रभा देवी का जन्म 17 फरवरी 1941 को हुआ था, कवर्धा विधानसभा से 1977 से लेकर 80 तक राम राज्य परिषद से वह 1980 से 85 तक कांग्रेस पार्टी से विधायक रहे। इस दौरान उन्होंने कृषि क्षेत्रों में आमूल चूल परिवर्तन किए, कई नहर नालियों का विस्तार व बिजली, पहुच विहीन अनेकों गांवों तक सड़क इन्हीं के कार्यकाल में हुआ। दिल्ली तक कवर्धा विधानसभा की धमक इनके कार्यकाल में महसूस किया जाता था। अविभाजित मध्य प्रदेश की राजनीति में भी अच्छी खासी दखल थी।

इस तरह रहा सफर नामा

राजमाता शशिप्रभा देवी का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य अंतर्गत सीतापुर जिले के मल्लापुर स्टेट में राजा गंगाप्रताप सिंह व माता रानी सावित्री देवी सिंह के घर 17 फरवरी सन 1941 को हुआ था। इनके पिता राजा गंगा प्रताप सिंह कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे, जिन्हें वर्ष 1926 में कमला नेहरू ने कांग्रेस प्रवेश कराया था। रानी शशिप्रभा देवी सर्वप्रथम सन 1977 में रामराज्य परिषद से कवर्धा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गई थीं। उन्होंने तब 17 हजार वोटों से जीत हासिल की थी।सनं 1977 से 1980 तक मध्य प्रदेश समाज कल्याण विभाग में उपाध्यक्ष रहीं। साथ ही रामराज्य परिषद में रहते हुए जनता पार्टी की उपाध्यक्ष भी रहीं।


राजनांदगांव जिला कांग्रेस की महिला अध्यक्ष रहीं

सन 1985 में कांग्रेस की टिकट पर कवर्धा विधानसभा की सीट 21हजार वोटों से जीतीं। 1989 में मध्य प्रदेश पंचायत कमेटी की सदस्य रहीं। 1984 में मध्यप्रदेश हाउसिंग कमेटी की उपाध्यक्ष रहीं। 1977 में मध्य प्रदेश आदिवासी हरिजन कल्याण विभाग में सदस्य रहीं। 1988 में राजनांदगांव जिला कांग्रेस(ई)महिला अध्यक्ष रहीं।

धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया

इतिहास व ज्योतिष शास्त्र में राजमाता शशिप्रभा देवी विशेष रुचि थी। इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में लगातार संतों की सेवा व विविध धार्मिक आयोजनों के माध्यम से अपने पूर्वजों की गौरवशाली परंपराओं का पूरी निष्ठा के साथ निर्वाह किया। उन पर धर्मसम्राट स्वामी करपात्रीजी महाराज की विशेष कृपा थी। वे धर्मसम्राट स्वामी करपात्रीजी महाराज एवम द्वारका शारदा पीठाधीश्वर व ज्योतिष्पीठाधीश्वर श्रीमज्जागदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के प्रति आजीवन श्रद्घावान होकर समर्पित रही। राजमाता शशिप्रभा देवी की दो पुत्रियां मंजरी देवी व वसुंधरा देवी तथा एक पुत्र राजा योगेश्वर राज सिंह पूर्व विधायक कवर्धा हैं।

बोड़ला के छीरपानी जलाशय का काम शुरू कराया

कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के विकास में राजमाता का विशेष योगदान रहा है। बोड़ला ब्लाक के छीरपानी जलाशय का निर्माण उन्हीं के प्रयासों से प्रारंभ हुआ था। कवर्धा के एकमात्र शासकीय महाविद्यालय के संचालन के लिए उन्होंने अपना राजमहल उपलब्ध कराया था । यही नहीं जब कवर्धा जिला बना तक भी अनेक कार्यालयों के संचालन के लिए राजमहल परिसर उन्होंने निश्शुल्क उपलब्ध कराया था। इसी प्रकार शिक्षा, चिकित्सा एवम कृषि के क्षेत्र में तथा अन्य क्षेत्रों में उनका योगदान अविस्मरणीय है। हर व्यक्ति उनकी निर्मल स्वच्छ छवि तथा क्षेत्र के प्रति उनके योगदान का स्मरण कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व श्रद्घासुमन व्यक्त किया।