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कवर्धा के किसान को मिला 13 हजार रुपये का बिजली बिल, घर में बस बल्ब और पंखे

कवर्धा जिले के ग्राम खपरी में सामान्य घरेलू खपत के बावजूद गरीब किसान नंदकुमार चंद्रवंशी को 13 हजार 820 रुपए का भारी बिजली बिल भेजा गया है। 50 हजार की ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 12:48:16 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 12:49:24 PM (IST)
कवर्धा के किसान को मिला 13 हजार रुपये का बिजली बिल, घर में बस बल्ब और पंखे
किसान बिजली बिल दिखाता हुआ।- स्वयं

नईदुनिया प्रतिनिधि, कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली और मीटर रीडिंग व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के ग्राम खपरी में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां झोपड़ीनुमा सामान्य घर में रहने वाले एक गरीब किसान को बिजली विभाग ने 13 हजार 820 रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया है।

घर में महज कुछ बल्ब और पंखे चलने के बावजूद इतना भारी बिल आने से पूरा परिवार स्तब्ध है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान के लिए इतनी बड़ी राशि चुकाना किसी बड़े संकट से कम नहीं है।

कुछ बल्ब और पंखों की खपत पर 13,820 रुपये का झटका

ग्राम खपरी निवासी नंदकुमार चंद्रवंशी के घर में बिजली मीटर क्रमांक 1002776251 स्थापित है। नंदकुमार के मुताबिक उनके घर में बिजली का सामान्य घरेलू उपयोग ही होता है। उन्होंने घर में न तो कोई नया भारी बिजली उपकरण लगाया है और न ही हाल के दिनों में खपत में कोई अचानक बढ़ोतरी हुई है। सामान्य रूप से रोशनी के लिए बल्ब और पंखों का इस्तेमाल करने वाले परिवार को जब इस माह 13 हजार 820 रुपये का बिल मिला, तो उनके होश उड़ गए। नंदकुमार ने आशंका जताई है कि या तो मीटर में कोई गंभीर तकनीकी खराबी आ गई है अथवा मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग दर्ज की गई है।


50 हजार की सालाना आय में भारी बिल भरना नामुमकिन

पीड़ित किसान नंदकुमार चंद्रवंशी की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उनके पास मात्र दो एकड़ कृषि भूमि है, जिससे सालभर की कुल आमदनी करीब 50 हजार रुपये ही हो पाती है। परिवार में चार सदस्य हैं और इस सीमित आय में पूरे साल का गुजारा किसी तरह होता है। ऐसे में अपनी वार्षिक कमाई का लगभग एक-चौथाई हिस्सा केवल एक महीने के बिजली बिल के रूप में चुकाना उनके बूते से बाहर है। पीड़ित किसान ने विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उनके घर लगे मीटर का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराया जाए और त्रुटिपूर्ण बिल में सुधार कर राहत प्रदान की जाए।

बिलिंग व्यवस्था से त्रस्त ग्रामीण, दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर

इस घटना के सामने आने के बाद खपरी और आसपास के ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में अवांछित और मनमाने बिजली बिलों की समस्या आम हो चुकी है। कई गरीब किसान और मजदूर परिवार लगातार गलत बिलिंग का दंश झेल रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि जब वे अपनी शिकायत लेकर बिजली दफ्तर पहुंचते हैं, तो उनकी सुनवाई नहीं होती और उन्हें महीनों तक कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

पारदर्शी जांच और मीटर परीक्षण की मांग

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में मीटर रीडिंग और बिलिंग व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए। हालांकि, नंदकुमार के इस बिल में तकनीकी गड़बड़ी हुई है या मानवीय भूल, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। लेकिन इस मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता पर कड़े सवालिया निशान जरूर लगा दिए हैं।