
कवर्धा(ब्यूरो)। बिलासपुर के नेमीचंद अस्पताल में नसबंदी शिविर के दौरान महिलाओं की हुई की घटना से नाराज कांग्रेसियों ने बुधवार को प्रदेश बंद का ऐलान किया था। जिसके चलते जिले में बंद का मिला जुला असर रहा। दोपहर बाद अधिकांश दुकानें खुल गई थी। वहीं आक्रोशित कंग्रेसियों ने जोराताल चौक में मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री का पुतला फूंका तथा इस्तीफा देने की मांग की।
बिलासपुर से 10 किमी दूर कानन पेंडारी के नेमीचंद अस्पताल में लगे शिविर में आपरेशन के बाद 83 महिलाओं में से 13 महिलाओं की मौत हो गई तथा काफी महिलाओं की स्थिति नाजुक बनी हुई है। इस घटना की निंदा करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को प्रदेश बंद का आह्वान किया था तथा कांग्रेसियों ने मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल से इस्तीफा मांगा।
शहर में घुमते रहे कार्यकर्ता
प्रदेश स्तरीय बंद के तहत कांग्रेस के कार्यकर्ता सक्रियता दिखाते हुए सुबह से ही शहर में पैदल घुमते हुए दुकान बंद कराने के लिए निकले। लेकिन उसके पहले ही सुबह छोटे बड़े सभी व्यापारियों ने दुकान बंद कर जबरदस्त समर्थन दिया। इसे लेकर कार्यकर्ताओं में खुशी व्याप्त थी। घटना की निंदा करते हुए कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष महेश चन्द्रवंशी, टेकसिंह चन्द्रवंशी, अगमदास अनंत, चुनवाखान, मोहित माहेश्वरी, संतोष नामदेव सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोगों की सुरक्षा न कर पाने वाले ऐसे सरकार को स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए। भाजपा राज में महिलाएं सुरक्षित नहीं है उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। एक के बाद एक अनेक घटनाएं घट रही है और सरकार आंख बंद कर बैठी है।
पिपरिया बंद सफल, दशरंगपुर असफल
जिले में बंद के दौरान कहीं पूर्ण सफल रहा तो कहीं इसका असर नहीं देखा गया। पिपरिया में बाजार का दिन होने के बाद भी बंद का असर रहा। व्यापारियों ने दुकाने बंद कर सहयोग दी वहीं लोहारा, पंडरिया ,बोड़ला व दशरंगपुर में मिलाजुला असर रहा। बंद के चलते जिले भर में पुलिस की चाक चौबंध व्यवस्था रही। चाक चौबंध व्यवस्था के चलते कहीं कोई घटना घटित होने की जानकारी नहीं मिली। वहीं पेट्रोलिंग पार्टी ने भी सतर्कता बरतते हुए पुलिस बल के साथ चक्कर काटते रहे। सामानों के लिए भटकते रहे लोग
बंद का ऐसा असर रहा है कि सुबह के समय दैनिक उपयोग के सामानों के लिए लोग भटकते रहे। यहां तक की गुटखा, पाऊच, बिड़ी, सिगरेट, तंबाखू खाने वालों को एक भी पान ठेले खुले नहीं मिले। लोगों को इसकी तलब लगते ही एक दूसरे से जुगाड़ करते रहे। किराना स्टोर बंद रहने से घरेलू उपयोग के सामानों के लिए भी लोग दुकानों की चक्कर काटते रहे।दोपहर 1 बजे के बाद दुकाने खुलनी प्रारंभ हो गई तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।