
नईदुनिया न्यूज, कवर्धा। रेंगाखार तहसील अंतर्गत ग्राम भीमभौरी में अवैध वृक्ष कटाई और लकड़ी तस्करी के मामले का राजफाश हुआ है। राजस्व विभाग, वन विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मौके पर आम के 12 पेड़ अवैध रूप से कटे हुए पाए गए। पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपितों द्वारा कटे हुए लट्ठों पर वन विभाग की फर्जी मुहर लगाकर उन्हें वैध दर्शाने की कोशिश की जा रही थी।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस लकड़ी को मध्य प्रदेश के इंदौर भेजने की तैयारी थी। संयुक्त टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके से एक ट्रक और क्रेन को जब्त कर लिया है। अब इस पूरे संगठित नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
कार्रवाई की शुरुआत नायब तहसीलदार प्रेमनारायण साहू को मिली एक गुप्त सूचना के बाद हुई। सूचना के आधार पर जब राजस्व अमला ग्राम भीमभौरी पहुंचा, तो वहां खसरा क्रमांक 108 में आम के 12 पेड़ कटे हुए मिले। कटे हुए लट्ठों को परिवहन के लिए वाहनों में लोड किया जा रहा था। मामला संदिग्ध लगने पर तत्काल वन विभाग और स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाया गया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने देखा कि लट्ठों पर वन विभाग की मुहर लगी हुई है। मौके पर पहुंचे डिप्टी रेंजर भूपेंद्र कुमार ने जब इस मुहर का बारीक निरीक्षण और सत्यापन किया, तो वह पूरी तरह फर्जी पाई गई। सरकारी सील के दुरुपयोग की बात सामने आते ही मामले की गंभीरता बढ़ गई।
संयुक्त जांच में यह बात सामने आई कि इस पूरी खेप को छत्तीसगढ़ से बाहर मध्य प्रदेश के इंदौर शहर भेजने की योजना थी। इसके लिए बाकायदा क्रेन और ट्रक की व्यवस्था की गई थी। अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से लकड़ी परिवहन में लगे ट्रक और क्रेन को जब्त कर रेंगाखार पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया है। तीनों विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में घटना स्थल का पंचनामा तैयार कर वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई। समय रहते हुई इस संयुक्त दबिश से तस्करी की एक बड़ी खेप बाहर जाने से पहले ही रोक दी गई।
इस मामले के सामने आने के बाद अब वन विभाग, राजस्व और पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से जांच को आगे बढ़ा रही हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि वन विभाग की फर्जी मुहर किसने और कहां तैयार की, इस अवैध कटाई के पीछे मुख्य सूत्रधार कौन है, और इंदौर में यह लकड़ी किसे भेजी जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा प्रतीत होता है। अवैध वृक्ष कटाई, सरकारी मुहर के कूटरचित इस्तेमाल और तस्करी की धाराओं के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन संपदा की सुरक्षा के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे संयुक्त अभियान आगे भी जारी रहेंगे।