अजब-गजब छत्तीसगढ़: देवताओं के विरुद्ध सामने आए 157 मामले, 35 मामलों में आजीवन कारावास, कई को एक साल की रिमांड
इस वर्ष देवताओं की अदालत में कुल 157 मामले प्रस्तुत किए गए। इनमें से 35 मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, लोकविश्वा...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 04:48:04 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 04:58:08 PM (IST)
HighLights
- एक साल तक रिमांड में रहेंगे कई देवता
- अगली भादो जात्रा में सुनाया जाएगा फैसला
- हानिकारक माने जाने वाले देवताओं की सुनवाई हुई
चिराग उपाध्याय, नईदुनिया, केशकाल। बस्तर अंचल की लोक आस्था और अनूठी आदिवासी परंपराओं में से एक देवताओं की अदालत से जुड़ी केशकाल की प्रसिद्ध भादो जात्रा रविवार को पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हो गई। देवताओं की अदालत में कुल 157 मामले प्रस्तुत किए गए। इनमें से 35 मामलों में देवताओं को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। कुछ मामलों में फैसला नहीं सुनाया जा सका। ऐसे मामले से जुड़े हुए देवताओं को भंगाराम मंदिर की एक साल रिमांड में रहना होगा।
जात्रा में अंचल के 9 परगना से जुड़े 20 गांवों के देवताओं को प्रस्तुत किया गया था। शनिवार को देवता केशकाल थाने भी ले जाए गए थे। जहां पुलिस अधिकारियों ने उनका स्वागत किया था।
परंपरा के अनुसार हुआ आयोजन
जात्रा उत्सव के दौरान समाज के लिए हानिकारक माने जाने वाले देवी-देवताओं और शक्तियों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर परंपरा के अनुसार फैसला सुनाया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा, लोकविश्वास और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा के साक्षी बने।
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देवताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई परंपरा में हिस्सा लेते ग्रामीण। - नईदुनिया
एक साल की ‘रिमांड’ पर रहेंगे कुछ देवता
स्थानीय मान्यता के अनुसार जब किसी देवी-देवता या शक्ति को समाज के लिए हानिकारक माना जाता है, तो उससे जुड़े मामले को देवताओं की अदालत में प्रस्तुत किया जाता है। कुछ मामलों में तत्काल निर्णय नहीं लिया जा सका,। ऐसे देवता को एक वर्ष तक रिमांड पर रखने की परंपरा के अनुसार देवता को रिमांड पर रखा गया है। अगले वर्ष भादो जात्रा के दौरान उस मामले को फिर से अदालत में लाया जाएगा और परंपरा के अनुसार अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।
जात्रा से वापस लौटते देवता। - नईदुनिया
लगाई गई देवताओं की अदालत
इस संबंध में भादो जात्रा के मुख्य पुजारी सरजू राम गौर ने बताया कि जात्रा के दूसरे दिन देवताओं की अदालत लगी। समाज के लिए हानिकारक माने जाने वाले देवी-देवताओं के मामलों की सुनवाई की गई। इस वर्ष कुल 157 मामले आए हैं, जिनमें 35 मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में संबंधित देवताओं को एक वर्ष तक रिमांड में रखा जाता है, जिसके बाद अगले वर्ष होने वाली भादो जात्रा में उनकी दोबारा सुनवाई कर अंतिम फैसला सुनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसमें समाज की आस्था एवं पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
दूसरे दिन सुनाया जाता है फैसला
भादो जात्रा के दूसरे दिन देवताओं की अदालत की प्रक्रिया विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहती है। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे देवी-देवताओं की उपस्थिति में परंपरागत तरीके से मामलों पर विचार किया जाता है। जिन देवी-देवताओं को समाज के लिए नुकसानदायक माना जाता है, उनके संबंध में लोकपरंपरा के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
पूरी प्रक्रिया में आधुनिक न्याय व्यवस्था की तरह
देवताओं की अदालत में न्यायाधीश नहीं रहते हैं। कानूनी धाराएं भी नहीं होती हैं लेकिर स्थानीय आदिवासी आस्था और वर्षों से चली आ रही पारंपरिक मान्यताओं पर निर्णय लिए जाते हैं।
आस्था के साथ सामाजिक व्यवस्था का भी संदेश
केशकाल की भादो जात्रा में होने वाली देवताओं की अदालत स्थानीय लोकविश्वास और सामाजिक परंपरा का हिस्सा हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार समाज को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियों के मामलों में देवताओं की अदालत के माध्यम से निर्णय लिया जाता है। यही वजह है कि इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए दूर-दराज के ग्रामीण और श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।