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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 05, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कोंडागांव में मतांतरितों को अजजा वर्ग से बाहर करने की मांग को लेकर उमड़ा जनसैलाब

डिलिस्टिंग महारैली : संविधान में कहा गया है कि वे धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ।

By Kadir KhanEdited By: Kadir Khan
Publish Date: Thu, 05 May 2022 08:15:57 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 May 2022 08:15:57 PM (IST)
कोंडागांव में मतांतरितों को अजजा वर्ग से बाहर करने की मांग को लेकर उमड़ा जनसैलाब
कोंडागांव में आदिवासी समुदाय ने मतांतरण के विरोध में निकाली रैली।

कोंडागांव (नईदुनिया न्यूज)। जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले मतांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर (डिलिस्टिंग) करने की मांग को लेकर गुरुवार को कोंडागांव के चौपाटी मैदान में वृहद जनसभा व महारैली का आयोजन किया गया। डिलिस्टिंग महारैली में आदिवासियों का जनसैलाब उमड़ा। डिलिस्टिंग की मांग को लेकर चौपाटी मैदान से विशाल रैली निकली जो महात्मा गांधी स्कूल प्रांगण में समाप्त हुई।

इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई। जनजाति सुरक्षा मंच कोंडागांव के संयोजक भोजराज नाग ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 में अनुसूचित जातियों के बारे में कहा गया है कि यदि वे धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। अनुसूचित जनजाति के लिए अनुच्छेद 342 है जिसमें यह प्रावधान नहीं है। 342 में भी यही प्रावधान होना चाहिए।


देश भर में अनुसूचित जनजाति वर्ग के करीब 20 फीसद लोग हैं जिन्होंने मतांतरण कर लिया है। यह लोग जनजातीय रीति रिवाज व पंरपरा को नहीं मान रहे हैं। मतांतरण के कारण गांव-गांव में तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। हमारे समाज के लोग मतांतरितों को समझा रहे हैं कि वापस मूल धर्म में आएं और आदिवासी संस्कृति व परंपरा से जुड़ें।

केंद्रीय जनजाति सुरक्षा मंच के संरक्षक हैदराबाद हाइकोर्ट के अधिवक्ता डा. एचके नागू ने कहा कि हमारी एक ही मांग है कि डिलिस्टिंग किया जाए। कुछ आदिवासी मतांतरण कर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं और हमें जनजाति में रहते हुए भी कुछ नहीं मिल रहा है।

मतांतरित हो चुके 20 फीसद लोग 80 फीसद का हक मार रहे हैं। वे अपनी संस्कृति व परंपरा भूल चुके हैं। उल्टा हमें ही बैकवर्ड व जंगल में रहने वाला कहते हैं। उन्होंने कहा कि केरला स्टेट वर्सेस चंद्रमोहन के केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर जनजाति का कोई व्यक्ति धर्म, संस्कृति व परंपरा छोड़कर दूसरे धर्म को मानता है तो उसे अनुसूचित जाति नहीं कहना चाहिए। इस मामले में कानून नहीं है। हम मांग करते हैं कि कानून बनाया जाए।

जनसभा व रैली में कोयावंशीय गोंडवाना समाज के अध्यक्ष मनहेर कोराम, उपाध्यक्ष फरसूराम सलाम, 18 गढ़ हलबा समाज के जिला अध्यक्ष दुलम नाग, पूर्व महासचिव नथलाल नाग, देव पुजारी कमलू मरकाम, कोंडगांव मुरिया समाज के ब्लाक अध्यक्ष महेंद्र नेताम, जनजाति सुरक्षा मंच की सह संयोजिका संगीता पोयाम, जिला संयोजक खेमचंद नेताम के साथ ही भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष लता उसेंडी, भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री केदार कश्यप, केशकाल के पूर्व भाजपा विधायक सेवकराम नेताम समेत हजारों की संख्या में जनजाति समुदाय के लोग शामिल थे।

यह है मंच की मांग

मंच की मुख्य मांग है कि राजनीतिक दल अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों पर मतांतरित व्यक्तियों को टिकट न दें, जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सरकारी नौकरी को हथियाने वाले गलत व षड़यंत्रकारी व्यक्तियों को बेनकाब करें, फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर अनुसूचित जनजाति बने व्यक्तियों की पहचान करके उन्हें जनजाति की सूची से बाहर करें। इसके अलावा अन्य मांगें भी रखी गई हैं।