लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के 3 महीने बाद पेट में मिला 80 CC पस, कोरबा के अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
कोरबा के शिवाय हास्पिटल में बच्चेदानी की सर्जरी के तीन महीने बाद महिला के पेट में 80 सीसी पस जमा हो गया। पीड़िता के पति ने अस्पताल पर फर्जी रिपोर्ट और लापरवाही का आरोप लगाकर कलेक्टर से जांच की मांग की है
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 09:59:49 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 09:59:49 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- बच्चेदानी और फैलोपियन ट्यूब की सर्जरी के बाद शुरू हुई थी सूजन।
- जांच के लिए सैंपल भेजे बिना ही थमा दी गई रिपोर्ट।
- परिजनों ने वीडियो साक्ष्य होने का किया दावा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के करीब तीन महीने बाद महिला के पेट में 80 सीसी पस जमा होने का मामला सामने आया है। पीड़िता के पति ने शिवाय हास्पिटल के चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही और फर्जी पस कल्चर रिपोर्ट जारी करने का आरोप लगाया है।
कलेक्टर से स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच कराने की मांग की गई है। पीड़िता सोनम अग्रवाल के पति विकास कुमार अग्रवाल के अनुसार, करीब तीन महीने पहले उनकी पत्नी की बच्चेदानी और फैलोपियन ट्यूब की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी हुई थी। इसके बाद आपरेशन स्थल पर सूजन, गांठ और पस निकलने की समस्या शुरू हो गई। सीटी स्कैन में करीब 80 सीसी पस जमा होने की पुष्टि हुई।
संक्रमण पेट की दीवार की त्वचा, मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों तक फैल गया था। बाद में शरीर के दूसरे हिस्से में भी पस जमा होने पर चीरा लगाकर उपचार करना पड़ा। स्वजनों का आरोप है कि अस्पताल ने पस कल्चर की रिपोर्ट उपलब्ध कराई, जबकि संबंधित हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच के लिए कोई सैंपल भेजा ही नहीं गया था। रिपोर्ट में 27 अक्टूबर को सैंपल लेने और एक नवंबर को जारी होने की तारीख दर्ज है।
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स्वजन का दावा है कि लैब के रिकार्ड में सोनम के नाम से सैंपल की कोई प्रविष्टि नहीं मिली। इस संबंध में वीडियो रिकार्डिंग होने की बात भी कही गई है। विकास अग्रवाल ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच, पत्नी के समुचित उपचार और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। परिवार के अनुसार, उपचार में अब तक चार से पांच लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत के आधार पर जांच कराने की बात कही है। वहीं, शिवाय हास्पिटल के डायरेक्टर डिविक मित्तल का कहना है अस्पताल प्रबंधन पर तीन माह बाद लगाया जा रहा आरेाप बेबुनियाद है। मरीज की हालत खराब उसकी और स्वजन की लापरवाही की वजह से हुई है। रही बात प्रशासन से शिकायत की तो उसका भी जवाब दिया जाएगा।