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3 साल बाद धरातल पर उतरा दर्री-बरमपुर बायपास, 83 करोड़ से बनेगी 8.20 KM सड़क

कोरबा में तीन साल के इंतजार के बाद दर्री-बरमपुर बायपास का निर्माण शुरू हो गया है। 83 करोड़ की लागत से 8.20 किमी सड़क दर्री बराज से बरमपुर तक बनेगी। इस...और पढ़ें

By Suresh kumar DewanganEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 09:23:02 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 09:23:02 PM (IST)
3 साल बाद धरातल पर उतरा दर्री-बरमपुर बायपास, 83 करोड़ से बनेगी 8.20 KM सड़क
निर्माण मे बाधक बेजाबब्जा हटाने का काम जारी, नईदुनिया

HighLights

  1. तीन साल बाद दर्री-बरमपुर बायपास का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
  2. 83 करोड़ की लागत से 8.20 किमी लंबी सड़क बनेगी।
  3. भारी वाहनों से शहर को मिलेगी राहत, जाम घटेगा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: शहर में भारी वाहनों के बढ़ते दबाव और जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित दर्री-बरमपुर बायपास सड़क का निर्माण आखिरकार शुरू हो गया है। राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने के करीब तीन साल बाद नगर निगम और लोक निर्माण विभाग ने परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में काम तेज किया है।

करीब 83 करोड़ रुपये की लागत से दर्री बराज से बरमपुर तक 8.20 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। फिलहाल सड़क के समतलीकरण का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं, मार्ग में बाधा बन रही पाइपलाइन और विद्युत पोल को शिफ्ट करने के साथ अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भी चल रही है। नगर निगम ने एक माह के भीतर पाइपलाइन और पोल शिफ्टिंग का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।


बायपास सड़क बनने से कुसमुंडा, गेवरा और बांकीमोंगरा क्षेत्र से आने वाले कोयला परिवहन वाहनों को शहर के भीतरी मार्गों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये वाहन बरमपुर नहर मार्ग से होते हुए सीधे दर्री बराज के पास कोरबा-कटघोरा मुख्य मार्ग से जुड़ सकेंगे। इससे सीएसईबी चौक, टीपी नगर, बुधवारी बाजार और बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाकों में भारी वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है।

साथ ही दुर्घटनाओं की आशंका घटने और आम नागरिकों को जाम से राहत मिलने की संभावना है। शहर में भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कोयला परिवहन वाहनों का दबाव कम नहीं हो पा रहा है। सीएसईबी चौक पर दिनभर ट्रकों की कतारें लगी रहती हैं।

कुसमुंडा और गेवरा क्षेत्र से आने वाले भारी वाहन रूमगढ़ा, बालको और रिसदी मार्ग से होते हुए उरगा-चांपा मार्ग तक पहुंच सकते हैं, लेकिन इस व्यवस्था का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। कुदुरमाल पुल से आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद भी शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ा है। रात में टीपी नगर से मुड़ापार मार्ग भारी वाहनों के लिए खोला जाता है। निर्धारित समय रात 10.30 बजे होने के बावजूद रात नौ बजे के बाद से ही भारी वाहनों की कतारें लगने लगती हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

यह भी पढ़ें- 325 करोड़ का परिसर अधूरा: कोरबा में आवास संकट, 600 छात्रों पर 240 बेड, हॉल में बिस्तर लगाकर ठहराए भावी डॉक्टर

यातायात सुरक्षा समिति की बैठकों में उठती रही मांग

शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम और दुर्घटनाओं की बढ़ती आशंका को देखते हुए यातायात सुरक्षा समिति की बैठकों में लंबे समय से बायपास निर्माण की आवश्यकता जताई जाती रही है। उद्देश्य यह था कि भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने से पहले ही वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए। इसी के तहत बरमपुर से दर्री बराज तक नहर किनारे सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद भी नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के बीच समन्वय की कमी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। अब निविदा और ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण की प्रारंभिक गतिविधियां शुरू हुई हैं।

रेलवे फाटकों पर जाम से भी मिलेगी राहत की उम्मीद

डीएसपीएम पावर प्लांट और बालको संयंत्र के लिए कोयला आपूर्ति करने वाली मालगाड़ियों के शहर के बीच से गुजरने के कारण सुनालिया, शारदा विहार, उषा काम्प्लेक्स, बुधवारी और मुड़ापार क्षेत्र के रेलवे फाटकों पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है। विशेष रूप से बुधवारी और मुड़ापार रेलवे फाटक बंद होने पर भारी वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस दौरान एंबुलेंस सहित अन्य आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस जाते हैं।

इन समस्याओं के समाधान के लिए रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में बायपास सड़क का निर्माण शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नया ट्रांसपोर्ट नगर भी अधर में

शहर में भारी वाहनों की आवाजाही का एक प्रमुख कारण वर्तमान ट्रांसपोर्ट नगर भी है। करीब 50 वर्ष पहले विकसित किया गया टीपी नगर अब बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के कारण शहर के मध्य में आ गया है। इससे मालवाहक वाहनों की आवाजाही और यातायात का दबाव बढ़ रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने बरबसपुर में नए ट्रांसपोर्ट नगर के लिए भूमि चिन्हित कर करीब 93 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया था।

हालांकि राजनीतिक विवादों और प्रशासनिक अड़चनों के कारण यह परियोजना अब तक आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसे में दर्री-बरमपुर बायपास के साथ नए ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण भी शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

वर्जन

सड़क निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। ठेकेदार से अनुबंध भी कर लिया गया है और सड़क समतलीकरण का काम शुरू हो गया है। पाइपलाइन और विद्युत पोल शिफ्टिंग का काम पूरा होने के बाद निर्माण में तेजी आएगी।

-जीआर जांगड़े, मुख्य कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग

दर्री-बरमपुर मार्ग में पाइपलाइन और विद्युत पोल शिफ्टिंग का काम एक माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मार्ग में किए गए बेजा कब्जे हटाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। आशुतोष पांडेय, आयुक्त, नगर निगम