नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: जिले के जंगलों में विचरण कर रहे हाथियों के दल में नए मेहमानों का आगमन जारी है। करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम साजापानी के पास हथिनी द्वारा बच्चे को जन्म देने के पांच दिन बाद अब कटघोरा वन मंडल के पसान वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम बनखेता के जंगल में भी एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया है। इसके साथ ही बनखेता के जंगल में विचरण कर रहे 52 हाथियों के दल की संख्या बढ़कर 53 हो गई है।
दल में दो गर्भवती हथनियां भी शामिल हैं। नन्हे हाथियों की मौजूदगी के कारण दल के व्यवहार को लेकर वन विभाग सतर्क है। विभागीय अमला हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है।
हाथियों का यह दल पिछले करीब पखवाड़े भर से पसान और मरवाही वन परिक्षेत्र के बीच बनखेता के आसपास विचरण कर रहा था। हाल ही में दल के वहां से आगे बढ़ने के बाद जंगल में प्लेसेंटा मिलने की जानकारी सामने आई। इसे हथिनी द्वारा बच्चे को जन्म दिए जाने का संकेत माना जा रहा है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद विभाग ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाते हुए लोगों को हाथियों के दल से दूरी बनाए रखने की समझाइश दी है। अब 53 हाथियों का यह दल मरवाही की ओर रवाना हो गया है।
वन विभाग के लिए हाथियों के दल में नए शावकों का जन्म एक ओर वन्यजीवों की आबादी में वृद्धि का संकेत है, वहीं दूसरी ओर इससे मानव-हाथी द्वंद्व की चुनौती भी बढ़ जाती है। नन्हे हाथियों के साथ विचरण करने वाला दल अधिक संवेदनशील हो सकता है।
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ऐसी स्थिति में हाथियों के नजदीक जाना, उन्हें देखने के लिए भीड़ लगाना या उनके रास्ते में बाधा उत्पन्न करना ग्रामीणों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसे देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथियों की मौजूदगी की सूचना तत्काल विभागीय अमले को देने की सलाह दी है।
कोरबा और कटघोरा वन मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में हाथियों की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। हाथियों के दल खेतों और गांवों के आसपास पहुंचते हैं तो जन-धन की सुरक्षा के साथ ही फसलों को बचाने की चुनौती भी सामने आती है। ऐसे में हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी और ग्रामीणों को समय पर सूचना देना महत्वपूर्ण हो गया है।
यहां यह भी बताना होगा कि जिले में हाथियों की बढ़ती संख्या के बीच वन्यजीवों और ग्रामीणों के बीच सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना भी जरूरी हो गया है। इसके लिए हाथियों के प्राकृतिक आवास और विचरण मार्गों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों को जागरूक करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
साजापानी में भी पांच दिन पहले हुआ था बच्चे का जन्म
इससे पहले करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम साजापानी के निकट कोरबा वन मंडल के जंगल में एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया था। इस घटना के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। गांव में हाथी के बच्चे के जन्म को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने 25 अक्टूबर को नवजात हाथी की छठी मनाने की तैयारी की है। इसके लिए निमंत्रण कार्ड भी छपवाए गए हैं। आयोजन के दौरान भंडारे की व्यवस्था भी की जाएगी।
लगातार दो क्षेत्रों में हथिनियों द्वारा बच्चों को जन्म दिए जाने से जिले के जंगलों में हाथियों की बढ़ती संख्या एक बार फिर चर्चा में है। वन्यजीवों की मौजूदगी को जहां प्रकृति के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, वहीं उनके संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
धान की फसल पकने से किसानों की बढ़ी चिंता
पसान वन परिक्षेत्र से हाथियों का दल मरवाही की ओर रवाना होने के बाद आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। क्षेत्र में धान की फसल पकने लगी है और किसान कटाई कर उपज को सुरक्षित रखने की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे समय में हाथियों की खेतों में आवाजाही से फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि हाथियों का दल क्षेत्र से दूर रहने पर वे बिना किसी बाधा के अपनी फसल काटकर सुरक्षित रख सकेंगे। हालांकि, हाथियों के लगातार बदलते विचरण क्षेत्र को देखते हुए सतर्कता जरूरी है।
वन विभाग के सामने अब हाथियों के दल की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के साथ ही ग्रामीणों को संभावित नुकसान से बचाने की जिम्मेदारी है।