नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: शिक्षा सत्र शुरू हुए लगभग तीन माह पूरा होने जा रहा है, लेकिन जिले के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी है। जिले के 15 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में कला, वाणिज्य और विज्ञान विषय के करीब 79 मानदेय शिक्षक पद रिक्त हैं। इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शिक्षण संचालनालय के माध्यम से की जानी है।
विभाग ने आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन इसमें करीब एक माह का समय लगने की संभावना है। ऐसे में विद्यार्थियों को पर्याप्त विषयवार पढ़ाई के बिना ही त्रैमासिक परीक्षा में शामिल होना पड़ सकता है। जिले में दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की तर्ज पर बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 65 स्वामी आत्मानंद स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 15 स्कूल अंग्रेजी माध्यम के हैं।
इन 15 में से तीन स्कूल सीबीएसई माध्यम से संचालित हैं, जबकि अन्य स्कूलों में छत्तीसगढ़ माध्यम की व्यवस्था है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में विषय शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद अब त्रैमासिक परीक्षा की तैयारी शुरू हो चुकी है।
21 सितंबर से परीक्षा आयोजित की जानी है। ऐसे में जिन विषयों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, उनमें विद्यार्थियों की तैयारी अधूरी है। नियमित कक्षाएं नहीं लगने के कारण विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्रवेश लेने का प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और विषयवार शिक्षा प्राप्त करना है, लेकिन शिक्षकों के अभाव में यह उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
जिले में शिक्षकों की कमी का मुद्दा नया नहीं है। पिछले वर्ष भी शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी सामने आई थी। पसान हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी से परेशान विद्यार्थियों ने मुख्य मार्ग पर चक्काजाम तक किया था।
इसके बाद भी जिले के कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हो सके हैं। ऐसे में अब आत्मानंद स्कूलों में रिक्त पदों पर भर्ती में हो रही देरी ने विद्यार्थियों की पढ़ाई को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
छात्रावासों में अटैच हैं 40 शिक्षक
जिले में करीब 186 आश्रम और छात्रावास संचालित हैं। इनमें अधीक्षक के लगभग 40 पद रिक्त हैं। इन पदों की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूलों के शिक्षकों को छात्रावासों में अटैच किया गया है। इनमें कई शिक्षक ऐसे स्कूलों से लिए गए हैं, जहां पहले से ही शिक्षकों की कमी बनी हुई थी। शिक्षकों के अटैच होने के बाद संबंधित स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था और प्रभावित हुई है। कई विद्यालय एकल शिक्षकीय व्यवस्था में चल रहे हैं, जबकि कुछ जगह एक शिक्षक को एक से अधिक कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
हर साल 50 से 60 शिक्षक हो रहे सेवानिवृत्त
जिले में प्रतिवर्ष करीब 50 से 60 शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त होने वाले पदों पर नियमित भर्ती नहीं होने के कारण शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। कई स्कूलों में नियमित शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए मानदेय शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। दूसरी ओर बीएड और डीएलएड जैसी व्यावसायिक डिग्री लेकर नियमित शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं में भी भर्ती नहीं होने को लेकर निराशा है।
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परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा असर
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार शिक्षकों की कमी का असर केवल मौजूदा कक्षाओं की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता और आगामी कक्षाओं की तैयारी पर भी पड़ता है। एक शिक्षक को एक से अधिक कक्षाओं या विषयों की जिम्मेदारी मिलने से विद्यार्थियों पर व्यक्तिगत ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। इसका असर परीक्षा परिणाम में भी दिखाई दे सकता है। इस वर्ष घोषित हाईस्कूल और हायर सेकंडरी परीक्षा परिणाम में जिले का कोई भी विद्यार्थी प्रदेश की टाप-10 मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सका।
युक्तियुक्तकरण के पांच मामले न्यायालय में लंबित
स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को संतुलित करने के उद्देश्य से पिछले वर्ष युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया लागू की गई थी। इसके तहत शिक्षकों को आवश्यकता के अनुसार नए पदस्थापना स्थल पर भेजा गया। इसके बाद भी पांच शिक्षकों ने नए स्थान पर समय पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। विभाग ने वेतन रोकने और नोटिस जारी करने जैसी कार्रवाई की, लेकिन संबंधित शिक्षक न्यायालय की शरण में चले गए। मामले न्यायालय में लंबित होने के कारण इन स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
राज्य शासन को जिले में संचालित अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के रिक्त सीटों की जानकारी भेजी जा चुकी है। शिक्षण संचालनालय से भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। रिक्त पद वाले स्कूलों में वैकल्पिक शिक्षकों से अध्यापन कराया जा रहा है। तामेश्वर उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी,