
कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पोड़ी-उपरोडा ब्लाक के ग्राम पंचायत कोरबी में एक सप्ताह के भीतर 50 से अधिक मवेशियों की मौत हो गई है। 100 से अधिक मवेशियों की हालत बिगड़ गई है। 14 जुलाई को पशु चिकित्सकों ने गांव में मवेशियों का टीकाकरण किया था। इसके बाद से ही गोवंशों की तबीयत बिगड़ने लगी और गोवंश की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। बीमार पशुओं की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
गलघोटू और एकटंगिया नामक दो बीमारियों के लिए मवेशियों को फोर्टीफाइड प्रोकेन पेनिसिलिन का टीका लगाया गया। पशु चिकित्सक ने अपने अधीनस्थ कर्मियों के साथ गांव में इस इंजेक्शन लगाया था। टीकाकरण के कुछ घंटे बाद ही गांव के पांच किसानों के मवेशियों की एक के बाद एक मौत हो गई और कई पशुओं की स्थिति गंभीर हो गई और इस तरह मृत मवेशियों की संख्या 50 पहुंच गई। केवल एक पशुपालक देवनारायण के ही 22 मवेशी टीका लगने के बाद मौत की नींद सो गए। इसी तरह ग्रामीण संजय कुमार किरण के पांच व छोटेलाल के भी पांच मवेशियों की मौत होना बताया जा रहा। मवेशियों की मौत आखिर किस वजह से हुई, इसकी जांच तो शुरू हो गई है पर पशुपालक यही दावा कर रहे कि टीका लगने के कारण ही यह घटना हुई है।
चारागाह, पानी व अन्य जगह से ले रहे नमूना
पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक एसपी सिंह ने कहा कि गांव से लगे जिस मुहल्ले में मवेशियों की मौत की बात कही जा रही है, वहीं पर और 202 पशुओं को टीका लगाया गया है। इसलिए टीके की वजह से मौत हुई, ऐसा नहीं लग रहा है, अन्यथा अन्य पशुओं में भी कुछ लक्षण दिखाई देते। एक ही मोहल्ले के मवेशी दिख रहे हैं, जो एक साथ घास चरने जाते हैं, जिनमें कुछ घास विषैले होते हैं या पानी जहां से पीया होगा, उसमें कुछ रहा होगा। कृषि सीजन में खाद का छिड़काव भी हो रहा है। इसलिए अलग-अलग जगह पर चारागाह, पानी व अन्य स्थानों से नमूना लिया जा रहा, जिसे रायपुर प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
यहां दस तस्वीर, जांच टीम को एक भी नहीं मिला शव
नईदुनिया के पास ग्राम कोरबी के मृत मवेशियों समेत दस पशु पालकों की तस्वीर उपलब्ध है, जबकि पशु चिकित्सा विभाग का कहना है केि जब टीम जांच के लिए कोरबी पहुंची, तो मंगलवार की स्थिति में कोई भी मृत या बीमार पशु नहीं मिला। इसलिए पोस्टमार्टम की कोई प्रक्रिया नहीं हो सकी। बीमार पशु की तलाश की जा रही, ताकि नमूना ले सकें। गलघोटू व एकटंगिया के लिए मार्च में एक लाख 22 हजार टीके का नया स्टाक प्राप्त हुआ था। इसमें एक लाख 15 हजार टीके समेत दो लाख 19 हजार टीकाकरण हो जा चुका है।
जो टीके लगे कहीं वे अमानक तो नहीं थे- कौशिक
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आखिरकार ऐसे कौन से टीके मवेशियों को लगाए गए, जिसकी वजह से करीब 50 मवेशियों की मौत हो गई। इस पूरे मामले के लिए कौन जिम्मेदार है और अब तक किस तरह के जांच किए गए हैं। पूरे प्रदेश में रोका-छोका और गौठान के नाम पर पशुधन रक्षा के दिखावे का काम हो रहा। जमीनी हकीकत कुछ और ही है। प्रदेश की सरकार केवल मात्र रोका-छेका, गौठान व गोबर खरीदी के नाम पर वाहवाही लूटने में लगी है। उन्होंने सवाल किया कि पशुधन को बचाने तत्काल शिविर क्यों नहीं लगाई गई। उन्होंने कहा कि जो टीके लगाए गए वह अमानक तो नहीं थे, इसकी जांच भी विशेषज्ञों से कराई जानी चाहिए।
आयोग सदस्य मिश्रा ने सीएम को कराया अवगत
राज्य गौ सेवा आयोग के सदस्य प्रशांत मिश्रा ने पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक एसपी सिंह से पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने मामले की जांच के निर्देश देते हुए आवश्यक कदम उठाने कहा है। मिश्रा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं विभागीय मंत्री रविंद्र चौबे को भी घटना से अवगत कराया है। मंत्री रविंद्र चौबे ने इस संबंध में गंभीरता से जांच करने और मौत के सही कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। प्रशांत मिश्रा ने मुख्यमंत्री एवं विभागीय मंत्री से प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा राशि शीघ्र दिलाने का भी आग्रह किया है। वे बुधवार को कोरबा लौटकर कोरबी जाएंगे।
विधायक मोहित से मिल ग्रामीणों ने मांगी मदद
ग्रामीणों ने दौरे पर आए पाली-तानाखार के विधायक मोहितराम केरकेट्टा को घटना की जानकारी दी, जिस पर उन्होंने मामले की गंभीरता से जांच एवं शासन से उचित मुआवजे की व्यवस्था किए जाने आश्वासन दिया। जिले में गाय-भैस व बछड़ों समेत कुल पशुओं की संख्या चार लाख छह हजार दर्ज हैं, जिनमें गर्भवती व छह माह से छोटे बछड़ों को छोड़कर शेष सभी का टीकाकरण किया जाना है।