कोरबा में नगर निगम और वन विभाग आमने-सामने, जड़ा ताला क्या होगा अब? मंदिर निर्माण की घोषणा का
कोरबा के पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी में नगर निगम के वाकथान और मंदिर निर्माण की घोषणा के बाद वन विभाग ने प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया है।
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 10:12:57 PM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 10:12:57 PM (IST)
राम कचहरी के प्रवेश द्वार में वन विभाग का तालाHighLights
- कोरबा के पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी पर वन विभाग का ताला।
- नगर निगम और वन विभाग के बीच अनुमति को लेकर तनातनी।
- वन संरक्षण अधिनियम के तहत अवैध निर्माण पर डीएफओ की सख्त नजर।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी के प्रवेश द्वार पर वन विभाग ने ताला लगा दिया है। इससे यहां आयोजित वाकथान और मंदिर निर्माण की घोषणा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम ने 17 अक्टूबर को दूधीडांगर से रामकचहरी तक 13 किलोमीटर की पदयात्रा कर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और अध्यात्म का संदेश दिया था।
आयोजन के दौरान रामकचहरी के विकास और मंदिर निर्माण की बात भी सामने आई थी। अब वन विभाग ने क्षेत्र में निर्माण को लेकर नियमों का हवाला देते हुए अनुमति की स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। हालांकि, आयोजन के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वाकथान का आयोजन में निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय सहित जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए थे। आयोजन के बाद रामकचहरी के प्रवेश द्वार पर ताला लगाए जाने से लोगों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संरक्षित वन क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने से पहले अनुमति संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं। मंदिर निर्माण की घोषणा को लेकर भी वन नियमों के तहत स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
17 अक्टूबर को आयोजित ‘चलो रामकचहरी-राम भांचा के द्वार’ वाकथान में फिल्म हनुमान अंश के नायक शोभिनव सत्य भी शामिल हुए थे। उन्होंने पुटका पहाड़ स्थित रामकचहरी में हनुमान प्रतिमा पर वंदन-लेपन कर पूजा-अर्चना की और ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण किया। उन्होंने आयोजन को अध्यात्म, प्रकृति, पर्यावरण और स्वच्छता का संगम बताते हुए नगर निगम की पहल की सराहना की थी।
कार्यक्रम में वनकर्मी भी थे मौजूद- आयुक्त
निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने कहा कि स्वच्छता अभियान पुनीत कार्य है और इसे वन क्षेत्र में भी चलाया जा सकता है। आयोजन के बाद स्थल की सफाई कराई गई थी। कचरे से संबंधित तस्वीरें कार्यक्रम के दूसरे दिन की हैं। अनुमति के सवाल पर उन्होंने कहा कि आयोजन में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए थे। मंदिर निर्माण की बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि जल संरक्षण और पौधारोपण में सहयोग किया जा सकता है।
अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी जानकारी जुटाएंगे- डीएफओ
वन मंडलाधिकारी कोरबा प्रेमलता यादव ने बताया कि आयोजन के समय वह प्रशिक्षण में थीं। कार्यक्रम के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी जानकारी ली जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन संरक्षण अधिनियम के तहत वन क्षेत्र में कोई भी निर्माण नहीं किया जा सकता। ऐसे में रामकचहरी में मंदिर निर्माण की घोषणा और उसके लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।