नईदुनिया न्यूज, कोरबा : नौतपा शुरू होने से पहले ही पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इंसानों के साथ पशु-पक्षियों पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। नगर पंचायत पाली में बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत हीट स्ट्रोक से हो गई है। पेड़ों पर डेरा जमाए चमगादड़ तेज गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं और नीचे गिरकर दम तोड़ रहे हैं। एक पेड़ में तो उलटा लटके हुए अवस्था में ही कई चमगादड़ों की मौत हो गई।
पाली में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग घरों में दुबकने को मजबूर दिखे। नौतपा 25 मई से शुरू होना है, लेकिन उससे पहले ही मई माह की तपिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। तेज धूप और उमस से लू का खतरा भी बढ़ गया है। नगर पंचायत पाली के नौकोनिया तालाब के आसपास स्थित पेड़ों में हजारों की संख्या में चमगादड़ों ने बसेरा बना रखा है।
हर वर्ष फरवरी और मार्च में प्रवासी चमगादड़ यहां पहुंचते हैं और तालाब किनारे पेड़ों पर डेरा जमाते हैं। इस बार इनकी संख्या पहले की तुलना में अधिक बताई जा रही है। तालाब किनारे लगे वृक्षों पर चमगादड़ अंगूर के गुच्छों की तरह लटके दिखाई देते हैं। सुबह और शाम तालाब के ऊपर उनकी उड़ान लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
उजड़ते जंगलों का सीधा असर: कोरबा जिले में औद्योगिक प्रसार, कोयला खदानों और शहरीकरण के नाम पर पिछले कुछ दशकों में लाखों पेड़ काटे गए हैं, जिसने स्थानीय इकोसिस्टम को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
'ग्रीन कवर' खत्म, बढ़ा 'हीट आइलैंड': जंगलों के सफाए के कारण सूरज की किरणें सीधे कंक्रीट और कोयले की धरती को तपा रही हैं, जिससे हवा में नमी गायब हो गई है और 'लू' जानलेवा हो चुकी है।
बेजुबानों के आशियाने छिने: पाली के नौकोनिया तालाब जैसे गिने-चुने जलस्रोतों के पास ही अब घने पेड़ बचे हैं। जब पूरे क्षेत्र का तापमान बढ़ता है, तो इन बचे-खुचे पेड़ों पर रहने वाले पक्षियों के लिए सर्वाइव करना नामुमकिन हो जाता है।
सिर्फ ट्रेलर है चमगादड़ों की मौत: पर्यावरणविदों के अनुसार, चमगादड़ों का इस तरह पेड़ से गिरकर मरना इस बात का संकेत है कि अब पर्यावरण इंसानों के रहने लायक भी नहीं बच रहा है।
हालांकि लगातार बढ़ रही गर्मी अब इनके लिए जानलेवा साबित हो रही है। 42 से 43 डिग्री तापमान के बीच चमगादड़ पेड़ों से नीचे गिर रहे हैं। तालाब किनारे कई पेड़ों के नीचे मृत चमगादड़ पड़े देखे गए हैं। ऐसी स्थिति पाली के अलावा आसपास के कई गांवों में भी देखने को मिल रही है, जहां बड़े तालाबों के किनारे पेड़ों पर चमगादड़ों का बसेरा है। मामले की जानकारी वन विभाग को भी दी गई है।
बढ़ती संख्या से उत्साहित थे पर्यावरण प्रेमी
पाली के नौकोनिया तालाब क्षेत्र में इस बार प्रवासी चमगादड़ों की संख्या अधिक होने से पर्यावरण और पक्षी प्रेमियों में उत्साह था। सुबह और शाम तालाब के ऊपर उनकी उड़ान देखने लोग पहुंचते थे। अब बड़ी संख्या में उनकी मौत होने से लोगों में चिंता बढ़ गई है।