कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्र की नई शिक्षा नीति हो या प्रदेश सरकार, प्राथमिक तक के बच्चों को पढ़ाने स्थानीय भाषा को प्राथमिकता दी गई है। यहां छत्तीसगढ़ी का प्रचलन है, जिसके अनुरूप प्राथमिक स्कूलों में छत्तीसगढ़ी में प्रकाशित पाठ्य पुस्तकें दी गई हैं। ऐसा इसलिए, ताकि बच्चों को आधारभूत शिक्षा समझने आसानी हो। दूसरी ओर स्वामी आत्मानंद स्कूलों में इस उद्देश्य के विपरीत बीच की कक्षाओं में दाखिले के लिए जारी दिशा-निर्देश उन बच्चों को प्राथमिकता देने कहा गया है, जिन्होंने पूर्व की कक्षाओं में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की है।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया अब भी जारी है। इन स्कूलों में एडमिशन को लेकर शासन से जारी गाइडलाइन में एक बिंदू यह भी है कि पहली के बाद की कक्षाओं में प्रवेश के लिए पूर्व से अंग्रेजी माध्यम से पढ़कर आने वाले बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। एक ओर केंद्र शासन की नई शिक्षा नीति में बच्चों को स्थानीय भाषा अथवा हिंदी में ही शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा, राज्य शासन भी छ्त्तीसगढ़ी में पढ़ाने पर ही जोर दे रहा, तो दूसरी ओर स्वामी आत्मानंद स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम को प्रवेश के लिए प्राथमिकता के क्रम में रखा जाना निर्धन परिवार से ताल्लुक रखने वाले जरूरतमंद वर्ग के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा का लाभ देने का उद्देश्य बाधित हो सकता है। इससे जरूरतमंद वर्ग के बच्चे व उनके पालक निराश हो रहे हैं। इस वर्ष स्वामी आत्मानंद की प्रत्येक संस्था में उपलब्ध सीटों के विपरीत आवेदनों की संख्या कहीं अधिक जमा हुई। स्कूलों की पहली कक्षा में कुल 240 सीट उपलब्ध हैं, जिनके विपरीत 600 से अधिक आवेदन शिक्षा विभाग को प्राप्त हुए थे। इस तरह देखा जा सकता है कि इन स्कूलों में पहली की प्रत्येक सीट पर दोगुने से अधिक बच्चों के बीच स्पर्धा की स्थिति है, जिसमें निर्धन वर्ग को हर हाल में प्राथमिकता देकर ही उन्हें योजना का लाभ से जोड़ने की शासन की मंशा पूर्ण हो सकेगी।
तो कैसे पूरा हो अंग्रेजी मीडियम का कोरम
शिक्षा विभाग का कहना है कि विशेष रूप से आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार के बच्चों को प्राथमिकता इन स्कूलों में देने का उद्देश्य शासन ने रखा है। ऐसा इसलिए ताकि वास्तव में जरूरतमंद वर्ग को योजना का समुचित लाभ मिल सके और वे बच्चे भी महंगे स्कूलों की तर्ज पर उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त कर सकें। निर्धन परिवार जब अपने बच्चों को अंग्रेजी के महंगे स्कूलों में पढ़ा ही नहीं सकते, तो भला बच्चे पूर्व की कक्षा में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा का नियम कैसे पूरा कर सकेंगे। ऐसे में आत्मानंद की अच्छी शिक्षा के लिए कम शुल्क का लाभ देख सक्षम वर्ग बाजी मार जाएगा।
छह स्कूलों में दो हजार बच्चों की क्षमता
पहली के 240 सीट छोड़ अंग्रेजी मीडियम के इन छह सरकारी स्कूलों को मिलाकर दूसरी से 11वीं तक 1836 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। लगभग प्रत्येक कक्षा में प्रवेश के लिए होड़ मची हुई है। ज्यादातर पालक व बच्चों को सीबीएसई प्रणाली से शिक्षा मिलने की बात ने यहां एडमिशन को आकर्षित किया। पर इस वर्ष भी मान्यता नहीं मिल पाने से केंद्रीय बोर्ड की शिक्षा की चाह को लेकर बन रही आशंका उन्हें परेशान कर रही। इन स्कूलों के लिए वर्तमान में कक्षा पहली से विभिन्ना कक्षाओं में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है। प्रत्येक कक्षा के लिए हर स्कूल में 40 सीट निर्धारित है।
नई संस्थाएं भी शुरू करने की तैयारी
कोरबा शहर से लेकर बालको, जमनीपाली, कुसमुंडा व गेवरा-दीपका समेत अन्य क्षेत्र में संचालित बड़े बैनर के निजी स्कूलों हर साल सीट की मारा-मारी की स्थिति देखने को मिलती है। भारी-भरकम फीस होने के बाद भी लोग अपने बच्चों को इन निजी संस्थाओं में प्रवेश दिलाने मशक्कत करते दिखाई देते हैं। यह सब केवल इसलिए, क्योंकि वर्तमान में सभी केंद्रीय बोर्ड की शिक्षा अपने बच्चों को देना चाहते हैं। यही सुविधा निर्धन वर्ग के बच्चों को देने वर्तमान में कोरबा, पाली व हरदीबाजार में दूसरे वर्ष एवं करतला व पोड़ी-उपरोड़ा में इस वर्ष से नए स्कूल शुरू करने की तैयारी चल रही।
फैक्ट फाइल
कक्षा दूसरी से 11वीं तक दर्ज संख्या
करतला- 174
पोड़ी-उपरोड़ा- 80
पाली- 549
हरदीबाजार- 508
पंपहाउस कोरबा- 525
कुल विद्यार्थी- 1836
पहली में प्रवेश जारी- 240 सीट
वर्जन
शासन की ओर से जैसी गाइड लाइन निर्धारित की गई है, उन्हीं का अनुसरण करते हुए जरूरतमंद वर्ग केे बच्चों को स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है। ऐसे परिवार के हर बच्चों को इस योजना का लाभ, यही प्रयास किया जा रहा है।
- जीपी भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी