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कोरबा में राखड़ डेम फूटने से बड़ा हादसा: राख के सैलाब में दबकर JCB ऑपरेटर की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

कोरबा के झाबू स्थित राखड़ डेम के फूटने से बड़ा हादसा हुआ, जिसमें जेसीबी ऑपरेटर की मौत हो गई।

By Devendra GuptaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 19 Apr 2026 03:49:19 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Apr 2026 03:49:19 PM (IST)
कोरबा में राखड़ डेम फूटने से बड़ा हादसा: राख के सैलाब में दबकर JCB ऑपरेटर की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल
झाबू में राखड़ डेम फूटने से बड़ा हादसा

HighLights

  1. पोकलेन ऑपरेटर और अन्य मजदूर बाल-बाल बचे
  2. डेम तीसरी बार टूटने का स्थानीय आरोप
  3. सुरक्षा और रखरखाव पर उठे गंभीर सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित एचटीपीपी के ग्राम झाबू में रविवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। यहां स्थित राखड़ डेम का एक हिस्सा अचानक फूट गया, जिससे राख का तेज बहाव नीचे की ओर फैल गया। इस हादसे में जेसीबी ऑपरेटर मलबे में दब गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

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काम के दौरान आई अचानक आपदा

जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे डेम के एक हिस्से में अचानक दबाव बढ़ गया। देखते ही देखते डेम का ऊपरी हिस्सा टूट गया और राख का सैलाब करीब 70 फीट नीचे आ गया। उस समय वहां मिट्टी फिलिंग का काम चल रहा था, जिसमें जेसीबी मशीन लगी हुई थी।


ऑपरेटर को संभलने का मौका तक नहीं मिला और राख के दलदल में वह मशीन सहित दब गया। घटना के समय कुल पांच मजदूर वहां काम कर रहे थे। पोकलेन ऑपरेटर और एक अन्य मजदूर किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे।

राहत कार्य में देरी, मची अफरा-तफरी

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही प्रबंधन और सुरक्षा टीम घटनास्थल पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

बताया जा रहा है कि एक जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा, लेकिन दूर से स्थिति देखकर वापस लौट गया। इसके बाद पुलिस दोपहर करीब दो बजे घटनास्थल पर पहुंची और राखड़ में फंसे शव को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।

हसदेव नदी में फैला प्रदूषण

हादसे के बाद डेम से निकली राख बहते हुए हसदेव नदी में समाहित हो गई। इससे नदी के पानी के प्रदूषित होने की आशंका बढ़ गई है, जो पर्यावरण और आसपास के लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह राखड़ डेम तीसरी बार टूटा है। डेम भर जाने के बाद उसकी ऊंचाई बढ़ाने का काम किया जा रहा था, लेकिन सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

लोगों का कहना है कि पहले भी कई बार डेम की कमजोर स्थिति को लेकर चेतावनी दी गई थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज किया। यही लापरवाही इस हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है।

क्या होता है राखड़ डेम

थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख को जमा करने के लिए राखड़ डेम बनाए जाते हैं। इनमें राख और पानी का मिश्रण जमा होता है, जिससे दबाव लगातार बना रहता है। यदि समय-समय पर रखरखाव नहीं किया जाए या दबाव नियंत्रण में न रहे, तो डेम के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे हादसों में तेज बहाव के साथ भारी मलबा निकलता है, जो आसपास काम कर रहे लोगों के लिए जानलेवा साबित होता है।

स्थानीयों में आक्रोश

घटना के बाद मजदूरों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कब तक जारी रहेगी और मजदूरों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा।