
कोरबा (निप्र)। गेवरा, दीपका व कुसमुंडा से प्रभावित ग्रामीणों ने बैठक कर खदान के लिए जमीन नहीं देने का निर्णय लिया। बैठक में तय किया गया कि गांव के हर बेरोजगार को रोजगार तथा पुनर्वास समिति की बैठक पुनः कर समीक्षा की जाए। साथ ही जिला प्रशासन के समक्ष विरोध जताने पर सभी प्रभावितों ने अपनी सहमति जताई।
ग्राम भठोरा में आयोजित इस बैठक में भिलाई बाजार, रलिया, बाम्हनपाठ, पंडरीपानी, सलोरा, नरईबोध, बरभाठा, केसला पाली, सोनपुरी व पड़निया के ग्रामीण उपस्थित थे। बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इन गांव की जमीन गेवरा, दीपका तथा कुसमुंडा विस्तार परियोजना में समाहित हो रही है। ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन के रवैय्ये से आमजनों को अवगत कराया। तत्पश्चात सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पुनर्वास समिति की बैठक कर पुनः समीक्षा की जाए, गांव के प्रत्येक बेरोजगार को नौकरी मिलना चाहिए। वर्तमान सरकारी दर से जमीन का चार गुना ज्यादा मुआवजा मिलना चाहिए। इसी तरह ग्राम की सम्पूर्ण जमीन को अधिग्रहण करने होगा। एसईसीएल प्रबंधन पुनर्वास हेतु कम से कम दस डिसमिल जमी प्रभावित परिवार को उपलब्ध कराए। इसके साथ ही ठेका, सिविल कार्य, ओव्हरबर्डन, शापिंग काम्प्लेक्स, ट्रांसपोर्ट आदि विस्थापित लोगों को ही प्रदान किया जाए। बैठक में बताया गया कि आगामी 30 मार्च को जिलाधीश की उपस्थिति में शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर में सभी ग्रामीण अपनी बात प्रमुखता से रखेंगे और एसईसीएल को जमीन देने का विरोध करेंगे। इस मौके पर सभी ग्राम के सरपंच, माकपा के जिला सचिव सपुरन कुलदीप, सार्थक एनजीओ के लक्ष्मी चौहान, बृजेश श्रीवास सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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