• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • कोरबा

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 30, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Korba News : थर्मल ड्रोन कैमरे से रात में भी होगी अब हाथियों की निगरानी

Korba News : प्रभावित क्षेत्रों में जनवरी माह से थर्मल ड्रोन कैमरे से हाथियों की निगरानी शुरू हो जाएगी। आचार संहिता के कारण कटघोरा वनमंडल कार्यालय से ...और पढ़ें

By Devendra GuptaEdited By: Yogeshwar Sharma
Publish Date: Sat, 30 Dec 2023 12:20:40 AM (IST)Updated Date: Sat, 30 Dec 2023 12:20:40 AM (IST)
Korba News :  थर्मल ड्रोन कैमरे से रात में भी होगी अब हाथियों की निगरानी

कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रभावित क्षेत्रों में जनवरी माह से थर्मल ड्रोन कैमरे से हाथियों की निगरानी शुरू हो जाएगी। आचार संहिता के कारण कटघोरा वनमंडल कार्यालय से कैमरे की खरीदी की संविदा को निरस्त करनी पड़ी थी। विभाग के पास वर्तमान में एकमात्र सामान्य ड्रोन कैमरा है, थर्मल कैमरा उपलब्ध होने से रात के समय में हाथियों के गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। कर्मचारियाें की कमी से जूझ रहे हे वन क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को शासन से अवगत कराया जाएगा।

जिले के कोरबा और कटघोरा वन मंडल के प्रभावित ग्रामीणाें व हाथियों की सुरक्षा महज औपचारिक हो रहा है। विभाग में अमलों की कमी होने के कारण अधिकारी अपने दायित्व को पूरा करने में नाकाम हैं। दोनों वन मंडल के रिक्तियों पर गौर करें तो कोरबा में छह व कटघोरा में सात वन परिक्षेत्र हैं। हाथी प्रभावित होने के बाद भी 13 वन परिक्षेत्र में जटगा, चैतमा, लेमरू बालकों अभी तक स्थाई रेंज अफसरों की नियुुक्ति नहीं हुई। चारों वन परिक्षेत्र प्रभार पर चल रहे हैं। उससे विकट स्थिति वन रक्षकाें के खाली पदों की है। 112 स्वीकृति पदों में 48 पद खाली हैं। जिले वर्ष भर में सबसे अधिक समय हाथी पसान वन परिक्षेत्र में रहते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से इसे 16 वनक्षेत्र में विभाजित किया गया है। सभी वन क्षेत्रों वन रक्षकों की नितांत आवश्यकता है। यहां सेन्हा, लोकडहा, तिलईडांड़, जलके, कर्री व अड़सरा ऐसे वन क्षेत्र हैं जहां बीते तीन साल से वन रक्षकों के पद खाली हैं। नियुक्ति के अभाव में हाथियों के दल के आवागमन के बारे में सहीं समय में सूचना नहीं मिलती। बताना होगा 50 हाथियों का दल इन दिनों पसान, केंदई व एतमानगर में विचरण कर रहा है। किसानाें ने धान की फसल को को काटकर खलिहानों में रख लिया है। ऐसे में हाथी वहीं भी धमक कर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। गांव के आसपास हाथियों के विचरण से धान मिसाई का काम बंद हो गया है। बताना होगा कि हाथियों से जानमाल की हो रही नुकसान से ग्रामीणों में भय व्याप्त है। जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवाें में प्रभावितों के लिए आवास और सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा तो की गई लेकिन अब तक पहल शुरू नहीं हुई है। हाथियों संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में फसल नुकसान का दायरा भी बढ़ रहा है। हाथी संरक्षण को लेकर कारगर कदम नहीं उठाए जाने से किसान परेशान हैं।


इस वर्ष 558 हेक्टेयर अधिक फसल नुकसान

धान कटाई का काम पूरा हो चुका है। खरीफ वर्ष 2023 में अब तक हाथियों के दल ने कटघोरा व कोरबा वन मंडल 2,958 हेक्टेयर धान की फसल को रौंदकर नुकसान पहुंचाया है। यह आंकड़ा बीते वर्ष की तुलना में 558 हेक्टेयर अधिक है। प्रभावित किसानों को 1.23 करोड़ का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। वन विभाग केवल मुआवजा वितरण तक सीमित है। वन मंडल क्षेत्र में पर्याप्त कर्मियों की नियुक्ति नहीं होने से हाथी- मानव द्वंद्व बढ़ता जा रहा है। आठ साल पहले लेमरू को हाथी अभयारण्य घोषित कर बजट स्वीकृत किया गया पर हाथियों के रहवास के लिए काम शुरू नहीं हो सका है।

धान खरीदी पर हो रहा असर

हाथियों के विचरण से इन दिनों प्रभावित गांवों में धान कटाई से लेकर मिसाई का काम ठप है। इसका सीधा असर उपार्जन केंद्रों में हो रहा है। धान खरीदी शुरू होने के माह भर बाद पसान में 14,424 और लैंगा में 9,177 क्विंटल धान की खरीदी हुई है। धान की खड़ी फसल को हाथियाें के दल ने जिस तादात में नुकसान पहुंचाया है उससे खरीदी के अंत तक आवक कम होने की संभावना है।

काम नहीं आया गांवों में की गई सौर फेंसिंग

हाथियों को रहवासी क्षेत्र की ओर आने से रोकने के लिए सौर फेंसिंग, जंगल में ज्वार की खेती, सायरन आदि में करोड़ों खर्च किए गए लेकिन सभी का परिणाम सिफर ही रहा है। तीन साल पहले हाथियों की संख्या 48 थी, वह अब बढ़कर 82 हो गई है। पूर्व कलेक्टर संजीव झा ने पुटीपखना, गाड़ाघोड़ा, लोकड़हा सहित सात गांवों में सामुदायिक भवन बनवाने की बात कही थी, जिसकी शुरूआत नहीं हुई है। हाथियों की संख्या में वृद्धि से फसल नुकसान का दायरा भी बढ़ रहा है। मौसमी फसल होने के कारण किसान घाटे सहकर खरीफ की खेती तो कर रहे हैं लेकिन रबी फसल दायरा सिमट रहा है।

नहीं थम रहा हाथी- मानव मौत का सिलसिला

हाथी मानव द्वंद्व के बीच दोनों की ही जान जा रही है। जनवरी से अब तक हाथियाें ने पांच लोगों की जान ले ली है। इसमें एक व्यक्ति की मौत कोरबा वनमंडल में हुई है वहीं शेष चार मरने वाले कटघोरा वन मंडल के हैंं। उससे भी हैरत की बात है यह है कि चारों की जान लोनर हाथी ने ली है। इसी तरह तीन हाथी भी वन विभाग की लापरवाही के कारण मौत की भेंट चढ़ गए। इनमें एक वयस्क हाथी की मौत करंट की चपेट में आकर हुई शेष हाथी के बच्चों में एक की नदी में डूबने व दूसरे की कीचड़ में फंसने की वजह से जान चली गई।

इनका कहना

आदर्श आचार संहिता के कारण ड्रोन कैमरे की खरीदी के लिए जारी की गई निविदा को निरस्त कर दिया गया था। प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई है। नए साल में ड्रोन कैमरे में की सुविधा उपलब्ध हो जाएगा। इससे रात के समय हाथियों के गतिविधियों की जानकारी मिलने में आसानी होगी।

कुमार निशांत, डीएफओ, कटघोरा वन मंडल