
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सुनालिया और बेलगिरी नाला पुल निर्माण की दिशा में पहल हो रही है, लेकिन पुरानी बस्ती रानीरोड को सर्वमंगला मंदिर से सीधे जोड़ने के लिए हसदेव नदी पर प्रस्तावित रपटा निर्माण अब भी सरकारी स्वीकृति के इंतजार में है। सेतु निगम ने करीब सालभर पहले इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। इसके बावजूद योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। इसका खामियाजा पुरानी बस्ती समेत आसपास के क्षेत्रों के रहवासियों और मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।
शहर में बायपास मार्गों की कमी के कारण भारी वाहनों का दबाव बना हुआ है। कोयला खदानों से निकलने वाले वाहनों की आवाजाही के चलते सर्वमंगला चौक और पुल के आसपास अक्सर वाहनों की कतार लग जाती है। चैत्र और क्वांर नवरात्र के दौरान सर्वमंगला मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से यातायात का दबाव और बढ़ जाता है। ऐसे में जाम की स्थिति निर्मित होने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। पुरानी बस्ती से मंदिर पहुंचने के लिए लोगों को ओवरब्रिज की क्रासिंग पार कर सर्वमंगला पुल से होकर गुजरना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए हसदेव नदी पर लो-लेवल पुल यानी रपटा बनाने की योजना तैयार की गई है।
प्रस्ताव के अनुसार, रानीरोड स्थित पुरानी बस्ती को हसदेव नदी पर रपटा निर्माण के माध्यम से सर्वमंगला घाट से जोड़ा जाएगा। इससे शहर के एक बड़े हिस्से के लोगों को आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा। सेतु निगम की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार, रपटा करीब 300 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा होगा। इसके निर्माण पर लगभग 16 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
यह भी पढ़ें- कोरबा में सिकल सेल के 550 मरीज चिन्हित, पेंशन और शिक्षा सहायता का लाभ किसी को नहीं मिल रहा, जानकारी का अभाव
यह मार्ग छोटे चारपहिया और दोपहिया वाहनों के आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित है। इससे सर्वमंगला पुल पर वाहनों का दबाव कम होने के साथ पुरानी बस्ती, सीतामढ़ी, मानिकपुर, भिलाईखुर्द और ढेलवाडीह समेत आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, रपटा निर्माण से स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। इससे मुख्य पुल पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा नदी क्षेत्र में निगरानी बढ़ने से रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर नियंत्रण करने में भी सहूलियत हो सकती है। हालांकि, निर्माण के लिए बजट में स्वीकृति और राशि आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कालरी क्षेत्र के रहवासियों को मिलेगी राहत
रपटा निर्माण होने से सर्वमंगला, जटराज और चंद्रखुरी जैसे कालरी प्रभावित क्षेत्रों के रहवासियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में शिक्षा, चिकित्सा और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। वैकल्पिक मार्ग बनने से कॉलेज और रानी धनराज कुंवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना आसान हो सकेगा।
इसके साथ ही दुरपा, कुसमुंडा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में भी सुविधा मिल सकती है। रपटा बनने से स्थानीय स्तर पर आवागमन की दूरी और समय कम करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ केवल नवरात्र के दौरान ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी मिलेगा।
धार्मिक आयोजनों में भी मिलेगी सुविधा
सर्वमंगला मंदिर के अलावा रपटा निर्माण का लाभ अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भी मिलने की संभावना है। हसदेव नदी तट पर आरती, गणेश विसर्जन और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इन अवसरों पर मार्ग में भीड़ बढ़ने से आवागमन प्रभावित होता है। वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने से श्रद्धालुओं को राहत मिल सकती है।
सावन महीने में कनकेश्वरधाम की यात्रा करने वाले शिवभक्तों और कांवरियों के लिए भी यह मार्ग उपयोगी साबित हो सकता है। पुरानी बस्ती के कई श्रद्धालु सर्वमंगला पुल अथवा उरगा मार्ग से होकर नहर के रास्ते कनकेश्वरधाम पहुंचते हैं। रपटा बनने से सर्वमंगला घाट तक पहुंचने में सुविधा होगी और धार्मिक यात्राओं के दौरान यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
वर्जन
रानीरोड स्थित पुरानी बस्ती और सर्वमंगला मंदिर के बीच हसदेव नदी पर लो-लेवल पुल (रपटा) निर्माण का प्रस्ताव बजट में शामिल किया गया है। निर्माण की स्वीकृति और राशि आवंटन होने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा।
एमएम ओहदार, मुख्य कार्यपालन अभियंता, सेतु निगम