
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा : एसईसीएल की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में आउटसोर्सिंग कंपनियों के काम में प्रभावित भू-विस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने समेत विभिन्न मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने चक्काजाम किया। कुसमुंडा थाना के पास प्रदर्शनकारियों ने कोल परिवहन पूरी तरह रोक दिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। चक्काजाम से खदान के अंदर और बाहर भारी वाहनों की कतारें लग गईं।
तदुपरांत दर्री तहसीलदार और कुसमुंडा थाना प्रभारी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की। बैठक में एसईसीएल ने प्रशासन की मौजूदगी में 11 नवंबर को समस्याओं के समाधान का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद चक्काजाम समाप्त कर दिया गया।
किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के लिए जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित हुई, वे रोजगार के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रबंधन आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ मिलीभगत कर दूसरे जिलों और राज्यों से कर्मचारियों को भर्ती कर रहा है।
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कुसमुंडा और गेवरा में होने वाले कामों में प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही, जिससे उन्हें और स्थानीय बेरोजगारों को विरोध के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। जिला अध्यक्ष जय कौशिक और सचिव दीपक साहू ने कहा कि खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों की पूरी जमीन ले ली जाती है, लेकिन रोजगार में प्रभावित ग्रामीणों को पूरा अवसर नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि कंपनियां 30 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखते हुए जिले के बाहर के लोगों को भर्ती कर प्रभावितों के रोजगार के हक को छीन रही हैं।
छोटे रकबे वाले किसान खेती से अलग होकर पहले ही बेरोजगार हो गए हैं और रोजगार उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें काम से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रभावितों की मांगें नहीं सुनी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।
भू-विस्थापित नेता दामोदर श्याम और रेशम यादव ने आरोप लगाया कि जमीन गंवाने वालों को स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा और उनके परिवारों को आउटसोर्सिंग में काम नहीं दिया जा रहा। इस दौरान दामोदर श्याम, रेशम यादव, दीपक साहू, जय कौशिक, उत्तम दास, हरिहर, दीनानाथ, विकाश, दिलीप, सोनू, सागर पटेल, मोहम्मद हुसैन, राजेश्वर दास, शशि यादव, जय चंद बरेठ, शनि, रामकुमार और हरी साहू समेत प्रभावित क्षेत्र के बेरोजगार शामिल रहे।
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