
देवेंद्र गुप्ता, नईदुनिया कोरबा : बैंकाक में नौकरी दिलाने का झांसा देकर दर्री की एक 36 वर्षीय महिला को महाराष्ट्र की एक महिला ने बिचौलिए की भूमिका निभाते हुए बैंकाक के मानव तस्कर के हवाले कर दिया। वहां से पीड़िता को म्यांमार ले गए और वहां 17 माह तक बंधक बनाकर साइबर ठगी कराने के लिए उपयोग करते रहे। भारतीय दूतावास के माध्यम से रेस्क्यू कर किसी तरह अपराधियों के चंगुल से उसे छुड़ाया गया। पीडि़ता को सुरक्षित वापस कोरबा उसके स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया है। इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के गोंदिया निवासी 35 वर्षीया स्नेहा भथलाल बडोले को गिरफ्तार किया है।
दर्री निवासी पीड़िता ने इंटरनेट मीडिया पर बैंकाक में आफिस असिस्टेंट की नौकरी का विज्ञापन देखा था। इसमें प्रतिमाह 30 हजार थाई भाट वेतन (भारत में लगभग 86211 रुपये) देने का लालच दिया गया था। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद पीड़िता की महाराष्ट्र निवासी स्नेहा भथलाल बडोले से बातचीत हुई। इसके बाद अप्रैल 2025 में पीड़िता मुंबई पहुंची, जहां से महिला उसे विमान से बैंकाक ले गई। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद महिला ने उसे मानव तस्करी गिरोह के हवाले कर खुद वापस लौट आई।
वहां से अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह के सदस्य उसे सड़क मार्ग से म्यांमार के केके पार्क ले गए। वहां पीड़िता का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और उसे बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया। इसके साथ ही फर्जी इंटरनेट मीडिया खातों के जरिए आनलाइन ट्रेडिंग व निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करने के लिए मजबूर किया गया। अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के इस मामले में भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय, स्थानीय प्रशासन और संबंधित देश की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय से रेस्क्यू किया गया और पीड़िता को 31 अगस्त 2026 को सुरक्षित भारत वापस लाया गया।
इसके बाद पीड़िता की शिकायत पर दर्री थाना में भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(2) और 146 में मामला दर्ज किया गया। विवेचना में महिला की संलिप्तता सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर कोरबा लाया गया। न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस ने उसकी रिमांड प्राप्त की है। अब जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा विदेश में नौकरी का झांसा देकर कितने लोगों को इस तरह निशाना बनाया गया है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि पीड़िता को गिरोह के हवाले करने के बदले गिरफ्तार महिला को कोई रकम मिली थी या नहीं।
प्रकरण की जांच कर रहे प्रशिक्षु आइपीएस व दर्री के सीएसपी विमल पाठक ने बताया कि मानव तस्करी और साइबर ठगी में संलिप्त गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित तरीके से काम कर रहा है। जांच में गिरोह से जुड़े लोगों के पहचान दस्तावेज और मोबाइल नंबर फर्जी पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि म्यांमार में सैन्य शासन और वहां की परिस्थितियों के कारण नौकरी के इच्छुक लोगों को सीधे वहां जाने के लिए तैयार करना मुश्किल होता है।
इसी वजह से बैंकाक में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों को वहां बुलाया जाता है और फिर सड़क मार्ग से म्यांमार पहुंचा दिया जाता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीड़िता को गिरोह के हवाले करने के बदले स्नेहा भथलाल बडोले को कोई रकम मिली थी या नहीं। साथ ही पुलिस, गिरोह के अन्य सदस्यों और उसके वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
सीएसपी विमल पाठक ने लोगों से इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित विदेशी नौकरी के आकर्षक विज्ञापनों पर भरोसा करने से पहले उनकी सत्यता जांचने की अपील की है। अनजान व्यक्तियों के माध्यम से विदेश जाने, बिना सत्यापन के नौकरी स्वीकार करने और अपने पासपोर्ट या अन्य दस्तावेज किसी दूसरे के हवाले करने से बचने की सलाह दी है।