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'आवा पानी झोंकी' अभियान जिसने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की बदल दी तकदीर, पीएम मोदी भी इसके हुए मुरीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 29 Mar 2026 04:33:44 PM (IST)Updated Date: Sun, 29 Mar 2026 04:45:28 PM (IST)
'आवा पानी झोंकी' अभियान जिसने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की बदल दी तकदीर, पीएम मोदी भी इसके हुए मुरीद
कोरिया का 'आवा पानी झोंकी' अभियान बना देश के लिए मिसाल।

HighLights

  1. कोरिया का 'आवा पानी झोंकी' अभियान बना देश के लिए मिसाल
  2. पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की जल संरक्षण मॉडल की तारीफ
  3. कोरिया जिले में मनरेगा और 5% मॉडल से सुनिश्चित हुई जल सुरक्षा

नईदुनिया प्रतिनिधि, बैकुंठपुर। कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा राज्य शासन के मोर गाव मोर पानी महा अभियान के अंतर्गत “आवा पानी झोंकी” अभियान संचालित किया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर व्यापक जनभागीदारी पर आधारित आंदोलन बना दिया है। इस अभिनव प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान तब मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर भी इस मॉडल को सराहना प्राप्त हुई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल द्वारा भी कोरिया मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य पहल के रूप में उल्लेखित किया गया, जिससे इसकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएं स्पष्ट होती हैं। पृष्ठभूमि की बात करें तो कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित था।


जन आंदोलन की अवधारणा और सामुदायिक समन्वय

“जल संचय जन भागीदारी अभियान” के अंतर्गत लागू 5% मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया, साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत संरचनाएं बनाई गईं। इस अभियान में सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय देखने को मिला, जहाँ महिलाओं ने नीर नायिका और युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई। ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त बनाया गया, जिससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना।

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2025 की उपलब्धियां और भूजल स्तर में सुधार

साल 2025 की उपलब्धियों (जल पुनर्भरण) पर नजर डालें तो जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह जल मात्रा लगभग 230–235 (12000 m³/तालाब) बड़े तालाबों के बराबर और 1800 से अधिक (1500 m³/डबरी) डबरियों के बराबर है। (गणनाएं मानक वैज्ञानिक मानकों एवं सावधानीपूर्वक किए गए आकलन पर आधारित हैं।) सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

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2026 में प्रगति और भविष्य का संकल्प

वर्ष 2026 में प्रगति की बात करें तो 20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं, जिनके अंतर्गत 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं। जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि "कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।"

कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाए जाने की दिशा में अग्रसर है।