Ramdaha Waterfall: अंबिकापुर(असीम सेन गुप्ता)। साल के घने जंगलों, नदी नालों से आच्छादित उत्तर छत्तीसगढ़ का रमदहा जलप्रपात भी पिछले कुछ वर्षों से सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां सुविधाओं का विस्तार तो नहीं हुआ है लेकिन यहां की खूबसूरती छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी प्रांत मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती शहरों से लोगों को अपनी ओर खींच लाती हैं। प्रकृति ने रमदहा जलप्रपात और उसके आसपास के क्षेत्र को इस तरह सजाया और संवारा है कि पहली नजर में ही यह सैलानियों को भा जाता है।

कई फीट की ऊंचाई से बनास नदी का गिरता पानी तथा आसपास घने जंगल इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। यही कारण है कि अवकाश के दिनों में बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित यहां प्रकृति का आनंद उठाने पहुंचते हैं।रमदहा जलप्रपात, बनास नदी पर एक बहुत ही सुंदर झरना है।यह कोरिया जिले के भरतपुर जनपद पंचायत मुख्यालय जनकपुर से लगभग 35 किमी की दूरी पर स्थित है।कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से 110 किमी और मनेन्द्रगढ़ से 70 किलोमीटर दूर स्थित रमदहा जलप्रपात तक पहुंचने के लिए सड़क अच्छी है। सिर्फ दो-तीन किलोमीटर सड़क को छोड़ दे तो यहां आसानी से सैलानियों का वाहन पहुंच जाता है।

मध्य प्रदेश के सीमा से लगे रमदहा में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन द्वारा कई स्थानों पर सुरक्षात्मक बोर्ड लगवाए गए हैं। जलप्रपात के आसपास सैलानियों के भोजन,पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं रहती है।यहां स्थानीय स्तर पर भी व्यवसायी दुकानें नहीं लगाते। यहां पहुंचने वाले सैलानी सारा प्रबंध खुद करके जाते हैं। इस जलप्रपात से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर छोटा सा गांव बेनीपुरा है। यह भरतपुर जनपद पंचायत का अंतिम छोर का गांव है। शुरू में यहां पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या गिनी चुनी रहती थी लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरीके से बदल चुकी हैं।

यह जलप्रपात न सिर्फ उत्तर छत्तीसगढ़ बल्कि पड़ोसी प्रांत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी प्रसिद्धि पा चुका है। दिसंबर और जनवरी के महीने के दौरान यहां लोग पहले पिकनिक मनाने के लिए आते थे। वर्तमान में प्रत्येक दिन सैलानियों का यहां आना जाना लगा रहता है।यह जलप्रपात पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से विकसित है जो वर्षा के दिनों में अपनी सौंदर्यता बिखेरता है, यह जलप्रपात पूरी तरह से प्राकृतिक है। बनास नदी का पानी ऊंचाई से जब नीचे गिरता है तो नीचे से ऐसा प्रतीत होता है मानों धुंध ने समूचे स्थल को घेर लिया है। झरने से गिरता पानी आगे चलकर बनास नदी का विराट स्वरूप ले लेता है।

प्राकृतिक सुंदरता के कारण ही यहां लोग पहुंचते हैं। प्रकृति का मनोहारी दृश्य यहां देखने को मिलता है। विकास के नाम पर यहां निर्माण कार्य नहीं होने से सब कुछ सालों पुराना है। प्रकृति अपने मूल स्वरूप में यहां नजर आती है। चारों ओर घना जंगल और बीच में रमदहा जलप्रपात है।यह जलप्रपात कोरिया जिले का सबसे खूबसूरत जलप्रपात में से एक है। चट्टानों से टकराते हुए गिरता पानी दूध की तरह दिखाई देता है जो किसी पर्यटक को अपनी और आकर्षित करने के लिए काफी है। इसके आसपास के घने जंगल इसकी खूबसूरती में चार चार चांद लगाते हैं। जंगलों की बीच रास्तों से होते यहां तक जाना भी एक अलग ही सुकून देता है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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