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नईदुनिया प्रतिनिधि, महासमुंद। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात देकर महासमुंद जिले के ग्राम बेलटुकरी (तुमगांव) निवासी संजय डहरिया ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में 946वीं रैंक हासिल कर कीर्तिमान रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव सहित पूरे जिले में खुशी का माहौल है। परिवार, मित्रों और ग्रामीणों ने संजय को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प का परिणाम
संजय डहरिया की सफलता को ग्रामीणों ने मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प का परिणाम बताया है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और लगातार अध्ययन के बल पर यह मुकाम हासिल किया। संजय की सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
संजय शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। उनकी रैंक के आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) मिलने की प्रबल संभावना है।
संजय के पिता एक सामान्य कृषक हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार में दो बड़े भाई और एक बहन के बाद 37 वर्षीय संजय सबसे छोटे हैं।
कैंसर को हराकर तीसरे प्रयास में मिली सफलता
संजय डहरिया की सफलता संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। यूपीएससी की तैयारी के दौरान उनकी लार ग्रंथि में कैंसर का पता चला था। इसके बाद करीब चार वर्षों तक मुंबई में उनका उपचार चला। कठिन इलाज और परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे।
बीए अर्थशास्त्र से स्नातक करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष 2022 में उन्होंने पहला प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2023 में दूसरे प्रयास में वे मुख्य परीक्षा तक पहुंचे, पर अंतिम चयन नहीं हो पाया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल करते हुए 946वीं रैंक प्राप्त की।
संजय का कहना है कि उन्होंने बीमारी को चुनौती के रूप में स्वीकार किया और उससे उबरने के बाद पूरी लगन से तैयारी की। उनके अनुसार ईश्वर पर भरोसा, लक्ष्य के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम ही सफलता का मूलमंत्र है।
मनोबल बनाए रखा
संजय ने बताया कि कठिन समय में कई बार उनका मन विचलित हुआ, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर नहीं होने दिया। वे लगातार खुद को प्रेरित करते रहे और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच ने ही उन्हें सफलता तक पहुंचाया।
शिक्षकों का मिला मार्गदर्शन
संजय की सफलता में उनके स्कूली शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। शिक्षकों ने प्रारंभ से ही उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और मार्गदर्शन दिया। उन्होंने अपने शिक्षकों बेदराम गिलहरे, सुरेंद्र मानिकपुरी और बालाराम सोनी सहित परिवार और मित्रों के सहयोग का भी उल्लेख किया।
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