
नईदुनिया प्रतिनिधि, महासमुंद। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक नाट्य विधा ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले छोटे से ग्राम गड़बेड़ा में दशकों से मंचित की जा रही ठेठ छत्तीसगढ़ी रामलीला को अब राष्ट्रीय गौरव प्राप्त हुआ है। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित प्रतिष्ठित अयोध्या शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित 'ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ द रामायण' (राम वनगमन पथ की रामलीला संदर्भ छत्तीसगढ़) में गड़बेड़ा की रामलीला समिति का ससम्मान विशेष उल्लेख किया गया है।
अयोध्या शोध संस्थान की ओर से तैयार किए गए इस वैश्विक दस्तावेज में गड़बेड़ा की रामलीला के अनूठे स्वरूप को रेखांकित किया गया है। यहां की रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से छत्तीसगढ़ी बोली और आंचलिक मिठास में प्रस्तुत की जाती है।
वरिष्ठ रंगकर्मी प्रीतराम सूर्ये के कुशल निर्देशन और संवाद लेखन में सजी यह प्रस्तुति पारंपरिक दोहों और चौपाइयों के साथ-साथ शेरो-शायरी के अनूठे तालमेल के लिए जानी जाती है। राष्ट्रीय पुस्तक में इस रामलीला को स्थान मिलने से समूचे क्षेत्र और स्थानीय कलाकारों में भारी उत्साह का माहौल है।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी के पावन अवसर पर गड़बेड़ा में भव्य रामलीला की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शीतला मंदिर परिसर में स्थित सामुदायिक भवन में स्थानीय युवा कलाकार प्रतिदिन कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रीतराम सूर्ये के मार्गदर्शन में युवा कलाकार भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और पवनपुत्र हनुमान के चरित्रों को ठेठ छत्तीसगढ़ी संवाद शैली में जीवंत करने में जुटे हुए हैं। स्थानीय दर्शकों के बीच इस प्रस्तुति को लेकर गहरा आकर्षण रहता है।
दशहरे के पावन दिन शाम को मुख्य रामलीला मंचन की पूर्णाहुति के बाद आतिशबाजी के साथ 30 फीट ऊंचे विशालकाय रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके उपरांत रात्रि में रायपुर के विख्यात लोक कला मंच 'नवा अंजोर' द्वारा छत्तीसगढ़ी संस्कृति, गीत और नृत्य पर आधारित मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए ग्राम पंचायत, सरपंच बूंदाबाई नायक, रामलीला समिति और ग्राम विकास समिति के तमाम सदस्य लगे हुए हैं।