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महासमुंद में डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग, लिपिक बना व्याख्याता, आठ माह तक लिया ज्यादा वेतन, अब दर्ज होगा अपराध

महासमुंद जिले के सिरपुर स्कूल के एक लिपिक ने खुद को व्याख्याता बताकर आठ महीने तक तेरह लाख रुपये का अतिरिक्त वेतन निकाल लिया। कोष एवं लेखा विभाग की जां...और पढ़ें

By Ashutosh Kumar SharmaEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 09:36:13 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 09:41:13 PM (IST)
महासमुंद में डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग, लिपिक बना व्याख्याता, आठ माह तक लिया ज्यादा वेतन, अब दर्ज होगा अपराध
सिरपुर वेतन अनियमितता मामले की प्रतीकात्मक तस्वीर। - एआई

HighLights

  1. लिपिक ने खुद को व्याख्याता बताकर आहरित किया अतिरिक्त वेतन
  2. आठ महीने में शासन को तेरह लाख रुपये की आर्थिक क्षति का अनुमान
  3. वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोप में प्राचार्य समेत दो निलंबित

नईदुनिया प्रतिनिधि, महासमुंद। कोष एवं महालेखाकार रायपुर के अधिकारियों ने जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरपुर में पदस्थ एक सहायक ग्रेड-02 लिपिक द्वारा स्वयं को 'व्याख्याता एलबी' बताकर आठ माह तक अतिरिक्त वेतन आहरण करने का मामला पकड़ा। अब इस मामले में जांच उपरांत लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने सम्बंधित स्कूल के प्राचार्य व जिला शिक्षा कार्यालय के लिपिक नारायण प्रसाद निर्मलकर को निलंबित किया है।

शुरुआत में इस धोखाधड़ी की भनक न तो स्कूल के प्राचार्य को लगी और न ही बीईओ, डीईओ या जिला कोषालय अधिकारी को। दरअसल, यह मामला जनवरी 2026 में सामने आया। रायपुर स्थित संचालनालय कोष एवं लेखा ने अचानक से सिरपुर स्कूल में ज्यादा वेतन निकलता देखकर जांच की, तब ज्ञात हुआ कि लिपिक नारायण प्रसाद ने स्वयं को व्याख्याता बना लिया है और व्याख्याता का वेतन ले रहा है। यही नही एक अन्य व्याख्याता को भी उसके वेतन से अधिक वेतन दिया जा रहा है। तब, तुरंत लिपिक को निलंबित किया गया।


डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर बदला पदनाम

जानकारी के अनुसार, संबंधित कर्मचारी नारायण प्रसाद निर्मलकर स्कूल में सभी का वेतन तैयार करता था। वह प्राचार्य उमा ठाकुर (अब इस मामले में निलंबित) से डिजिटल सिग्नेचर कराकर कोषालय से वेतन आहरित करवा लेता था। डीईओ द्वारा जारी पत्र के अनुसार, निर्मलकर ने मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच अपने मूल पदनाम (लेवल-06) को बदलकर व्याख्याता एलबी (लेवल-09) कर लिया और वेतन निर्धारण में भी वृद्धि कर ली। इस प्रक्रिया के माध्यम से उसने शासन को लगभग 13 लाख रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई।

प्राचार्य से लेकर कोषालय अधिकारी तक की चूक !

इस वित्तीय अनियमितता ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लिपिक द्वारा लगातार आठ माह तक बढ़ा हुआ वेतन आहरित किया गया, लेकिन प्राचार्य, ब्लाक शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आनलाइन रिकार्ड मिलान में यह गड़बड़ी नहीं पकड़ी गई। जिला कोषालय अधिकारी के पास हर माह जाने वाले वेतन पत्रक की जांच में भी इस चूक का न पकड़ा जाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

अबतक नहीं हुई एफआईआर, विभागीय जांच जांच

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय कुमार लहरे ने 27 जनवरी को लिपिक को निलंबित कर बीईओ कार्यालय अटैच कर दिया था। हालांकि मामला आर्थिक अपराध से जुड़ा होने के कारण कलेक्टर विनय कुमार ने एफआईआर के निर्देश दिए थे, किन्तु अबतक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

मंगलवार को होगी एफआईआर

आज हाईकोर्ट में होने के कारण एफआइआर दर्ज नहीं कराएं हैं। मंगलवार को थाने में सभी दस्तावेज के साथ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।

-बीएल देवांगन, डीईओ महासमुंद