Chattisgarh Water Conservation: महासमुंद में 'मोर गांव मोर पानी' अभियान को मिल रही सफलता, 31 करोड़ लीटर जल भंडारण की क्षमता विकसित
महासमुंद जिले में 'मोर गांव मोर पानी' अभियान के तहत वर्षा जल संरक्षण के लिए 31 करोड़ लीटर भंडारण क्षमता विकसित की गई है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में मनर...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 06 Jul 2026 02:40:06 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 02:42:07 PM (IST)
महासमुंद में विकसित की गई जल संरक्षण संरचनाओं मे भरा पानी। विभागHighLights
- 551 पंचायतों में जनभागीदारी से जल संरक्षण कार्य संपन्न
- मनरेगा और प्रशासन की पहल से 31 करोड़ लीटर जल भंडारण
- भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए बोरवेल रिचार्ज पर विशेष ध्यान
नईदुनिया प्रतिनिधि, महासमुंद। जिले ने भू-जल स्तर को सुधारने और वर्षा जल को बचाने की दिशा में एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 'मोर गांव मोर पानी' अभियान 2.0 और मनरेगा के समन्वय से जिले में बड़े पैमाने पर जल संवर्धन के कार्य किए गए हैं। सभी 551 ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी से प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन किया जा रहा है। इन प्रयासों से 31 करोड़ लीटर पानी के भंडारण की क्षमता विकसित हुई है।
जिला प्रशासन की ओर से बोरी बंधान, सोख्ता गड्ढे, गेबियन, डाइक और जल अवशोषण खंतियों जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया है। एक ही वित्तीय वर्ष में जिले भर में 36 हजार से अधिक जल अवशोषण खंतियां और हजारों की संख्या में सतत कंटूर ट्रेंच बनाए गए हैं। इन कार्यों के परिणामस्वरूप जिले में 31 करोड़ लीटर पानी के एकमुश्त भंडारण की क्षमता विकसित हुई है।
भविष्य के लिए जल सुरक्षा
मानसून की पहली बारिश में ही इन सभी संरचनाओं के भर जाने से प्रशासन का उत्साह दोगुना है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। यह प्रयास न केवल आज की जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि भविष्य के लिए जल संकट का स्थायी समाधान साबित हो रहा है।
36 हजार खंतियों का निर्माण
जिला पंचायत के अनुसार, एक ही वित्तीय वर्ष में 36 हजार जल अवशोषण खंतियां, 8,200 स्टैगर्ड ट्रेंच, 30 हजार सतत कंटूर ट्रेंच, 51 डाइक, 52 गेबियन और 800 आजीविका डबरी सहित अनेक जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की गई हैं। मानसून की पहली बारिश में ही इन संरचनाओं में पर्याप्त जलभराव होने से वर्षा जल का संरक्षण शुरू हो गया है और भू-जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को गति मिली है।
स्थाई समाधान पर जोर
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने बताया कि जिले में जल संकट के स्थायी समाधान के लिए अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पहली ही बारिश में जल संरक्षण संरचनाओं का भर जाना इस पहल की सफलता का संकेत है और यह भविष्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।