
नईदुनिया प्रतिनिधि, महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्वास्थ्य ढांचे की बदहाली का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय स्थित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध 330 बिस्तरों वाले अस्पताल में पिछले दो दशकों से सघन चिकित्सा इकाई (ICU) शुरू नहीं हो सकी है।
जिले की करीब 12 लाख की आबादी और पड़ोसी जिलों के मरीजों के भरोसे चलने वाले इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में जीवनरक्षक आईसीयू न होना स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थिति यह है कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रायपुर या अन्य उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर कर दिया जाता है।
वर्ष 2006 में 100 बिस्तरों के साथ शुरू हुए इस जिला अस्पताल को वर्ष 2021 में मेडिकल कॉलेज की मान्यता मिलने के बाद 330 बिस्तरों में अपग्रेड किया गया था। वर्तमान में यहां महासमुंद के अलावा गरियाबंद और बलौदाबाजार जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों से रोजाना औसतन 550 से अधिक मरीज बाह्य रोगी विभाग (OPD) में परामर्श लेने आते हैं।
अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था की पोल इस बात से भी खुलती है कि कोविड महामारी के दौरान जीवन रक्षा के लिए पीएम केयर्स फंड से 6 और सीजीएमएससी के जरिए 9 समेत कुल 15 आधुनिक वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। आईसीयू वार्ड स्थापित न होने के कारण इन मशीनों का उपयोग ही नहीं हो पाया। बंद कमरों में रखे-रखे इनमें से 6 वेंटिलेटर खराब हो चुके हैं, जबकि शेष 9 मशीनें धूल फांकते हुए अपने उपयोग की बाट जोह रही हैं। सरकारी धन से खरीदे गए जीवनरक्षक उपकरणों का यह हश्र सीधे तौर पर चिकित्सकीय लापरवाही को दर्शाता है।
आईसीयू के नियमित संचालन के लिए केवल उपकरण नहीं, बल्कि क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ (इंटेंसिविस्ट), प्रशिक्षित एनेस्थेटिस्ट, चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले मेडिकल ऑफिसर और वेंटिलेटर संचालन में दक्ष नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि शासन स्तर पर आवश्यक मानव संसाधन और तकनीकी बजट की मांग लगातार भेजी जा रही है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी का कहना है कि आईसीयू वार्ड को जल्द शुरू करने के लिए प्रक्रिया जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इसे चालू कर दिया जाएगा।
वर्तमान में यदि महासमुंद या आसपास के क्षेत्रों में किसी व्यक्ति को गंभीर आघात, तीव्र सीने में दर्द या सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो, तो प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद समय नष्ट किए बिना विशेषज्ञ वेंटिलेटर सपोर्ट वाले उच्च चिकित्सा संस्थान (जैसे एम्स या मेकाहारा, रायपुर) का रुख करना चाहिए। गोल्डन ऑवर में सही फैसले से मरीज की जान बचाई जा सकती है। स्थानीय नागरिक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि घोषणाओं से आगे बढ़कर इस जीवनरक्षक इकाई को तत्काल क्रियाशील किया जाए।