महासमुंद। छत्तीसगढ़ में एक पच्चीस वर्षीय महिला अपने पड़ोसी किशोर का अपहरण कर करीब दो महीने तक उससे शारीरिक संबंध बनाती रही। मामले में सिद्धदोष पाए जाने पर महिला को लैंगिक अपराध , बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के विशेष न्यायाधीश निधि शर्मा तिवारी ने अलग-अलग धाराओं में 18 साल की सजा और चार हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर चार महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताई जाएगी।

अभियोजन के अनुसार घटना 10 जून से चार अगस्त 2018 के बीच की है। नगर के नयापारा निवासी एक पच्चीस साल की महिला अपने पड़ोसी किशोर को बहला फुसलाकर उसके इच्छा के विरुद्ध विवाह करने के लिए ले गई। उससे इस बीच शारीरिक संबंध बनाती रही।

नाबालिग के पिता ने सिटी कोतवाली महासमुंद में दर्ज कराए गए रिपोर्ट में बताया कि उनका बेटा 10 जून 2018 को शाम साढ़े चार बजे फोटो लेने जाने की बात कहकर घर से निकला जो वापस नहीं आया। इस पर पुलिस ने पहले गुमइंसान दर्ज कर पतासाजी की।

नहीं मिलने पर धारा 363 के तहत अपहरण का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया। इस दौरान पीड़ित बालक के मिलने पर पूछताछ में पुलिस को बताया कि आरोपित महिला उसे बहला-फुसलाकर ट्रेन से विशाखापटनम ले गई। जहां दो दिन रहने के बाद उसे रायगढ़ा ओडिशा ले गई। रायगढ़ा में किराये के मकान में रहते थे। इस दौरान महिला उसे पति बनाउंगी कहकर शारीरिक संबंध बनाती थी।

नाबालिग के बयान के आधार पर पुलिस ने धारा 4,6 पाक्सो एक्ट के तहत अपराध जोड़ा और प्रकरण न्यायालय में पेश की। जहां मामले की सुनवाई पूरी करते हुए विशेष न्यायाधीश निधि शर्मा तिवारी ने अपराध की गंभीरता और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए भादवि की धारा 363 के तहत तीन वर्ष की सजा और एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 के तहत पांच वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत दस वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।

अर्थदंड अदा नहीं करने पर क्रमशएक-एक और दो महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताई जाएगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी। इस लिहाज से महिला को दस साल कैद भुगतनी होगी।

Posted By: Hemant Upadhyay