छात्रावास के नए भवन में शिफ्टिंग को लेकर हो रहा विवाद
विद्यालय परिसर में स्थित सुविधाजनक ढंग से रह रही प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला की छात्राओं को तीन किलोमीटर दूर निर्जन में बने नए छात्रावास भवन में स्थानांतरित किए जाने की बात से छात्राएं एवं पालक चिंतित है। उनकी चिंता यह है कि छात्रावास से विद्यालय छात्राएं कैसे आना-जाना करेंगी।
Publish Date: Fri, 14 Jun 2024 12:08:14 AM (IST)
Updated Date: Fri, 14 Jun 2024 12:08:14 AM (IST)
HighLights
- निर्जन में बने छात्रावास में जाने के नाम पर ही सहमी छात्राएं
- विद्यालय परिसर में स्थित छात्रावास को नहीं छोड़ना चाहती छात्राएं,
- छात्राओं ने गिनाई परेशानी
नईदुनिया न्यूज, पेंड्रा : विद्यालय परिसर में स्थित सुविधाजनक ढंग से रह रही प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला की छात्राओं को तीन किलोमीटर दूर निर्जन में बने नए छात्रावास भवन में स्थानांतरित किए जाने की बात से छात्राएं एवं पालक चिंतित है। उनकी चिंता यह है कि छात्रावास से विद्यालय छात्राएं कैसे आना-जाना करेंगी।
परेशान छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में मिलनी वाली दोपहर की मध्यान्ह भोजन करने के लिए छात्राएं विद्यालय से छात्रावास कैसे जाएंगी, निर्जन होने के कारण उनकी सुरक्षा की दिक्कत है। इन्हीं सब कारण प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला को छात्राएं छोड़ना नहीं चाहती। स्कूली छात्राओं एवं उनके छात्रावास से जुड़ी पूरा मामले की जानकारी अधिकारियों को दी गई है। वीरांगना रानी दुर्गावती तिराहे में स्थित कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल सकोला परिसर में स्थित प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास को तीन किलोमीटर दूर बने नए छात्रावास भवन में स्थानांतरित करने की योजना बन चुकी है। प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास मड़ई एवं कोटमी की सीमा में निर्जन स्थान है जबकि अभी प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला का संचालन शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सकोला परिसर में है जहां कन्या मिडिल स्कूल सकोला भी संचालित है। बताया जाता है कि इस प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास सकोला में लगभग 50 छात्राएं रहती है जो परिसर में ही स्थित हाईस्कूल एवं मिडिल स्कूल में कक्षा छह से दस की छात्राएं हैं। इन्हीं छात्राओं को अब दूर निर्जन में बने नए छात्रावास भवन में ले जाने की योजना पर काम चल रहा है। इधर जब से छात्राओं को नए छात्रावास भवन में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी मिली है तब से छात्राओं एवं पालकों की नींद उड़ी हुई है। अपनी बच्चियों को हास्टल में रखकर पढ़ाई करा रहे पालक अब इस बात से चिंतित हैं कि वह अपने बच्चियों को दूर निर्जन में बने छात्रावास में कैसे रहने को भेज दें। पालकों की चिंता है कि उनकी बच्चियां इतनी दूर छात्रावास से स्कूल आने के बाद दोपहर का मध्यान्ह भोजन करने कैसे दोबारा छात्रावास जाएंगी। पालकों की चिंता यह भी है कि दूर निर्जन में बने छात्रावास में उनकी बच्चियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
ज्यादा अच्छा होगा नए भवन में पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास खुले : ग्राम मड़ई एवं कोटमी की सीमा में निर्मित छात्रावास भवन की उपयोगिता को लेकर उठे सवाल के जवाब में जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि ज्यादा अच्छा होगा कि नए बने आदिवासी कन्या छात्रावास भवन में पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास की स्थापना कर दी जाए। आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह बेहतर कदम होगा। जिले के सीमा में स्थित सकोला तहसील वर्तमान में शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है तथा वर्तमान में यहां अनेक शासकीय एवं अशासकीय विद्यालय स्थित होने के साथ यहां निजी नर्सिंग कालेज एवं निजी महाविद्यालय खोल दिए गए हैं। यहां पर कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल भी है जहां पड़ोसी जिले कोरबा के पसान मातिन क्षेत्र तक की छात्राएं पढ़ने के लिए आती हैं। लंबे समय से यहां पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास के स्थापना की मांग की जा रही है। पिछले वर्ष 4 जुलाई 2022को जब कोटमी में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भेंट मुलाकात कार्यक्रम में आए थे तब छात्राओं ने पुरजोर ढंग से यहां पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास के स्थापना की मांग की थी जिसकी उन्होंने स्वीकृति भी दी थी परंतु पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास खोलने की जगह आदिवासी विकास विभाग ने नया प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास का निर्माण कर दिया जबकि प्री मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास पहले से ही उपलब्ध है।
कर्मचारी निर्माण में गड़बड़ी के लिए ठेकेदार से मिलकर करते हैं खेल : जीपीएम जिले में आदिवासी कन्या छात्रावास सहित अन्य छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों को निर्जन स्थानों में बनाने के पीछे का खेल आदिवासी विकास विभाग के कर्मचारी ही ज्यादा लाभ कमाने के लिए निर्माण कार्य में गड़बड़ी के लिए ठेकेदार से मिलकर खेल रहे हैं। वे जानबूझकर इंजीनियर की मिली-भगत से ऐसी जगह छात्रावास भवनों की लेआउट दे रहे हैं जहां आम आदमी का आना-जाना ना हो और लोगों की नजर से दूर हो ताकि वे घटिया गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य ज्यादा से करके निर्माण कार्य में ज्यादा से ज्यादा लाभ कमा सके। पेंड्रा में निर्मित पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास उदाहरण है इसे शहर की आबादी से दूर शिकारपुर के आगे चौरासी बांध के पास बना दिया गया जो कि छात्रों के लिए बिल्कुल असुरक्षित है।
यह स्वाभाविक है कि भवन जहां रहेगा छात्राओं को वहां रहना मजबूरी होगी परंतु सवाल यह है कि जब पेंड्रा के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला परिसर में पर्याप्त मात्रा में खाली जमीन पड़ी है इसके बावजूद परिसर में पोस्ट मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास नहीं बनाने का मकसद क्या हो सकता है। आदिवासी विभाग को इतना तो अवश्य देखना चाहिए कि कन्या छात्रावास कैसी जगह पर बनाए जाएं खासकर तब जब पूरे छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर आदिवासी कन्या छात्रावास एवं आवश्यक विद्यालयों में विभिन्न घटनाएं सामने आ चुकी हैं जो छात्राओं की सुरक्षा को लेकर थे। ऐसे में जरूरी है कि जिले के आदिवासी विकास विभाग के निर्माण कार्यों की नए सिरे से समीक्षा की जाए। उल्लेखनीय है कि आदिवासी विकास विभाग में निर्माण कार्य एवं रिपेयरिंग के नाम पर दिसंबर 2023 में जो घोटाला हुआ था उसकी जांच रिपोर्ट तथा कार्रवाई भी अभी नहीं हो पाई है। इस संबंध में आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त से जानकारी लेने की कोशिश की गई परंतु संपर्क नहीं सका।