
मुंगेली। नईदुनिया न्यूज।
आधुनिक कृषि यंत्रों ने मवेशी बाजार को मंदा कर दिया है। ट्रैक्टर व अन्य यंत्रों के प्रयोग से जहां भैंसा और बैलों से हल चलाने वाले किसानों में कमी आई है, वहीं चारागाह की कमी के चलते लोग गाय, बकरी भी पालने से परहेज कर रहे हैं।
अत्याधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग से परंपरागत खेती की पद्घति के प्रति किसानों का रूझान घटा है। इसके चलते भैंसा और बैलों की मांग कम हुई है। इस परिवर्तन से मवेशी बाजार भी प्रभावित हुए हैं। जिले के मवेशी बाजारों में भैंसा और बैलों की बिक्री कम हो गई है। वहीं शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के चलते चारागाह का रकबा भी घटा है। लोग अब घरों में गाय, बकरी भी नहीं पाल रहे हैं। ग्राम खम्हरिया निवासी ननकूराम लंबे समय से मुंगेली के मवेशी बाजार में व्यवसाय करता है। उसने बताया कि पिछले पांच-सात वर्षों में ट्रैक्टर, रीपर व अन्य उपकरणों का चलन बढ़ा है। इससे दिन भर का काम घंटों में हो जाता है, जिससे लोग बैल, भैंस से खेती करने के बजाय अत्याधुनिक यंत्रों का सहारा ले रहे हैं। गांव-गांव में ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ गई है। लोरमी के मवेशी व्यवसायी टिकैतराम ने बताया कि जोताई और मिसाई के लिए ट्रैक्टर अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है, वहीं काम भी जल्दी होता है। मवेशियों की देख-रेख में अधिक खर्च हो जाता है। चारागाह के लिए जमीन भी नहीं है। इसके चलते बैल और भैंसों से खेती करने में किसानों की रूचि नहीं है। उसने बताया कि पांच साल पहले वह एक वर्ष में दो से ढाई सौ जोड़ी भैंसा बेच लेता था, लेकिन अब मुश्किल से 30-35 जोड़े की ही बिक्री हो पाती है।