
नईदुनिया न्यूज, नारायणपुर। अबूझमाड़ क्षेत्र में धर्म स्वातंत्र्य कानून के समर्थन में आदिवासी समाज खुलकर सामने आ गया है। बड़ेडोंगर परगना के 84 गांवों से 10 हजार से अधिक लोग जुटकर रैली और सभा के माध्यम से मतांतरण के विरोध में आवाज उठाई।
यह जुटान अहम माना जा रहा
छोटेडोंगर क्षेत्र में हाल के दिनों में बढ़े मतांतरण विवाद के बीच यह जुटान अहम माना जा रहा है। रैली में शामिल लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन करते हुए अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का संकल्प लिया।
बाहरी प्रभाव और प्रलोभनों का आरोप
सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाहरी प्रभाव और प्रलोभनों के कारण क्षेत्र में मतांतरण की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। आदिवासी नेता रुपसाय सलाम ने कहा कि समाज किसी धर्म विशेष के विरोध में नहीं है, बल्कि अपनी परंपरा और आस्था की रक्षा करना चाहता है।
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रांत अध्यक्ष राजाराम तोड़ेम ने कहा कि यह आंदोलन दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। समाज चाहता है कि मतांतरण कर चुके लोग स्वेच्छा से अपनी जड़ों की ओर लौटें।
30 अप्रैल तक की समयसीमा तय
बैठक के बाद सर्व आदिवासी समाज ने ‘घर वापसी’ के लिए 30 अप्रैल तक की समयसीमा तय की है। इस अवधि में लौटने वालों का स्वागत किया जाएगा।
इधर, पूरे घटनाक्रम को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है। संवेदनशील क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बाद पुलिस और प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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