
नारायणपुर(ब्यूरो)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई की ओर से विकसित कोर्स के जरिए बस्तर की आदिवासी बालाओं को कम्प्यूटर की शिक्षा मिल रही है।
भारत को कम्प्यूटर साक्षर बनाने की दिशा में आईआईटी मुंबई की ओर से विकसित स्पोकन ट्यूटोरियल प्रोजेक्ट के तहत महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान नारायणपुर का चयन किया गया था। छग में ये अकेली और पहली संस्था है जहां ये कोर्स शुरू किया गया है। प्रोजेक्ट के इस कोर्स को इंटरनेट से डाउनलोड कर सभी युवतियों के कंप्यूटर में फीड किए गए। सभी छात्राओं को ईयरफोन दिए गए हैं। इसके जरिए वे सी डबल प्लस, जावा और ब्लेंडर का कोर्स कर रही हैं। यहां कम्प्यूटर, सिलाई एवं हिंदी स्टेनो की 48 छात्राएं इसका कोर्स कर रही हैं। इन तीनों का एक-एक माह का कोर्स है। अब तक इन युवतियों ने सी डबल प्लस का लर्निंग कोर्स पूरा कर लिया है। स्पोकन ट्यूटोरियल प्रोजेक्ट से इन्हें लर्निंग सर्टिफिकेट दिया गया है। अब जावा और ब्लेण्डर का कोर्स इन्हें करना है। इसकी परीक्षा आयोजित की जाएगी और फिर इन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा। प्रशिक्षक जितेन्द्र कुमार काकड़े एवं योगिन्दर सिंह ने बताया कि वे युवतियों को नियमित रुप से मार्गदर्शन देते हैं। सिलाई की ट्रेनिंग कर रही छात्राओं को इस वजह से ये कोर्स कराया जा रहा है क्योंकि अब सिलाई की कटिंग एवं डिजाईन भी कम्प्यूटर से होने लगी है। प्रोजेक्ट के तहत छात्राओं को हिंदी भाषा से ज्ञान दिया जा रहा है क्योंकि यहां सभी हिन्दी भाषी हैं और इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं आ रही है। जावा और ब्लैंडर का कोर्स अभी शुरू नहीं किया गया है। इसके लिए प्रोजेक्ट से आदेश नहीं आया है।
कोई भी ले सकता है शिक्षा
आईटीआई नारायणपुर को कंप्यूटर के लिए रिसोर्स सेंटर का दर्जा दिया गया है। यहां स्कूल और कॉलेज का कोई भी विद्यार्थी आकर ये कोर्स कर सकता है। यहां अधिक से अधिक 20 बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था है। इस प्रोजेक्ट में किसी प्रशिक्षक की जरूरत नहीं होती है। विद्यार्थी खुद वीडियो के जरिए कम्प्यूटर शिक्षा ले सकता है।
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